प्रयागराज। महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत और 60 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए। इस घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं और आगे किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पांच बड़े बदलाव लागू किए हैं।
प्रशासन के पांच प्रमुख बदलाव
वाहन-मुक्त मेला क्षेत्र – महाकुंभ के पूरे मेला क्षेत्र को पूरी तरह से वाहन-मुक्त घोषित कर दिया गया है।
वीवीआईपी पास रद्द – किसी भी विशेष पास के आधार पर वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
एकतरफा यातायात प्रणाली – भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मेला क्षेत्र में एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई है।
सीमाओं पर वाहनों की रोक – प्रयागराज के आसपास के जिलों से आने वाले वाहनों को जिला सीमा पर ही रोक दिया जाएगा।
सख्त प्रतिबंध (4 फरवरी तक) – चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
प्रशासनिक प्रबंधन और तैनाती
सरकार ने भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया है। आईएएस अधिकारी आशीष गोयल और भानु गोस्वामी को तत्काल प्रयागराज भेजा गया है, जो 2019 के अर्धकुंभ के सफल संचालन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, भीड़ प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले पांच विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को भी महाकुंभ की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश और कार्रवाई
भगदड़ की घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और विभागीय समन्वय पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को महाकुंभ की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, प्रयागराज के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेल अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है, और परिवहन निगम को अतिरिक्त बसें तैनात करने का निर्देश दिया गया है।
जांच आयोग गठित और मुआवजा घोषित
भगदड़ के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया गया है, जिसमें न्यायमूर्ति हर्ष कुमार, पूर्व डीजी वीके गुप्ता और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वीके सिंह शामिल हैं। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।