नई दिल्ली. अमेरिका ने हाल ही में 205 अवैध भारतीय प्रवासियों को अपने मिलिट्री प्लेन C-17 के जरिए वापस भारत भेज दिया। ये लोग टेक्सास, सैन फ्रांसिस्को और अन्य शहरों में रह रहे थे। अमेरिका में अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सिविलियन प्लेन की बजाय मिलिट्री प्लेन के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिविलियन प्लेन की तुलना में मिलिट्री प्लेन से प्रवासियों को भेजना लगभग पांच गुना महंगा पड़ता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में ग्वाटेमाला भेजे गए प्रवासियों पर प्रति व्यक्ति लगभग $4,675 (करीब 4.07 लाख रुपये) खर्च हुआ, जबकि सिविल प्लेन से भेजने पर यह खर्च मात्र $853 (करीब 74,000 रुपये) होता।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में वापसी के बाद अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पहले भी अपने चुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को उठाया था और दावा किया था कि बाइडेन प्रशासन के दौरान मैक्सिको बॉर्डर से बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठ हुई। ट्रंप ने सत्ता संभालते ही प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी। ट्रंप ने न केवल अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की, बल्कि कनाडा और मैक्सिको पर ऊंचे टैरिफ लगाने की बात भी कही। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि मिलिट्री प्लेन के इस्तेमाल का मकसद केवल राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि ट्रंप की राजनीतिक मार्केटिंग भी हो सकता है।
ट्रंप के इस कदम को उनके समर्थकों के बीच मजबूत छवि पेश करने की रणनीति माना जा रहा है। वह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सरकार अवैध प्रवासियों पर कोई नरमी नहीं बरतेगी। हालांकि, इतनी महंगी प्रक्रिया अपनाने को लेकर विपक्ष और प्रवासी अधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। मिलिट्री प्लेन के उपयोग से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन आने वाले समय में और कड़े फैसले ले सकता है। यदि यह रणनीति जारी रही, तो भारत समेत अन्य देशों से अवैध रूप से अमेरिका जाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।