Meta ने भारत में लॉन्च किया Instagram Teen अकाउंट

By: PalPal India News
February 13, 2025

नई दिल्ली. किशोरावस्था एक ऐसा दौर होता है जब बच्चे न तो पूरी तरह छोटे होते हैं और न ही इतने बड़े कि अपने लिए सही फैसले ले सकें। इस डिजिटल युग में माता-पिता के लिए अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वे सोशल मीडिया पर किससे बातचीत कर रहे हैं, कितने घंटे ऑनलाइन बिता रहे हैं, या कहीं वे गलत संगति में तो नहीं पड़ रहे—ये सभी चिंताएँ माता-पिता को परेशान करती हैं, खासकर परीक्षा के दौरान।

इसी को ध्यान में रखते हुए Meta ने भारत में Instagram Teen अकाउंट लॉन्च किया है, जो किशोरों के लिए एक सुरक्षित सोशल मीडिया अनुभव प्रदान करेगा। इस फीचर के तहत माता-पिता अपने बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी रख सकेंगे और स्क्रीन टाइम को भी नियंत्रित कर सकेंगे। इस अकाउंट की एक खासियत यह भी है कि रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक कोई नोटिफिकेशन नहीं भेजा जाएगा, जिससे बच्चों की नींद पर असर न पड़े।

Instagram Teen अकाउंट के सेफ्टी फीचर्स
Meta ने इस नए अकाउंट को कई सुरक्षा सुविधाओं के साथ पेश किया है, जो 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को डिफ़ॉल्ट रूप से उपलब्ध होंगे। आइए जानते हैं कि इसमें कौन-कौन से सुरक्षा फीचर शामिल हैं:

प्राइवेट अकाउंट: किशोरों के अकाउंट डिफ़ॉल्ट रूप से प्राइवेट होंगे, जिससे केवल स्वीकृत फॉलोअर्स ही उनकी पोस्ट देख और उनसे बातचीत कर सकेंगे।
सुरक्षित मैसेजिंग: टीन यूजर्स केवल उन्हीं लोगों से मैसेज प्राप्त कर सकते हैं, जिन्हें वे खुद फॉलो करते हैं।
संवेदनशील कंटेंट कंट्रोल: यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से सक्रिय होगा, जिससे किशोर अनुपयुक्त कंटेंट को देख या साझा नहीं कर सकेंगे।
अनजान लोगों के टैग से सुरक्षा: कोई भी अनजान व्यक्ति टीन अकाउंट को टैग या मेंशन नहीं कर सकेगा। साथ ही, आपत्तिजनक भाषा को स्वचालित रूप से फ़िल्टर किया जाएगा।
टाइम लिमिट रिमाइंडर: यदि किशोर लगातार 60 मिनट तक ऐप का उपयोग करते हैं, तो उन्हें अलर्ट मिलने लगेगा।
स्लीप मोड: इस फीचर के तहत रात 10 PM से सुबह 7 AM तक कोई नोटिफिकेशन नहीं भेजा जाएगा, जिससे बच्चों की डिजिटल आदतें नियंत्रित रह सकें।
Meta का यह कदम किशोरों के लिए एक सुरक्षित और नियंत्रित सोशल मीडिया अनुभव सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल माता-पिता को राहत मिलेगी बल्कि बच्चों की डिजिटल आदतों को भी सही दिशा में मोड़ा जा सकेगा।

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