पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। वीकल फैक्ट्री जबलपुर और आयुध निर्माणी खमरिया एस्टेट में संचालित प्राथमिक स्कूलों में अगले सत्र से बच्चों की चहल-पहल नहीं रहेगी। आयुध निर्माणी बोर्ड के विघटन के बाद बने आयुध निदेशालय (समन्वय एवं सेवाएं) ने इन्हें बंद करने का निर्णय लिया है। बीते तीन साल से इनमें नए प्रवेश बंद थे। अभी पढ़ने वाले बच्चों को आसपास के शासकीय या महिला कल्याण समिति के स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा।
स्कूलों का संचालन आयुध निर्माणियां करती थीं। अक्टूबर 2021 में इनका विघटन कर सात रक्षा कंपनियां बना दी गईं, तब उनके लिए इन स्कूलों का संचालन करना कठिन हो गया। इसलिए इन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया। बच्चों का नुकसान नहीं हो, इसके लिए प्रदेश के शिक्षा विभाग से सम्पर्क कर स्कूलों के बच्चों के साथ इमारत व भूमि ट्रांसफर करने की पहल की गई। हालांकि, शिक्षा विभाग कोई निर्णय नहीं ले पाया। नतीजा यह हुआ कि अगले सत्र से सारी अधोसंरचना किसी काम की नहीं रहेगी। तीन साल से इन स्कूलों में नए एडमिशन नहीं होने से बच्चों की संख्या कम हो गई है। एक समय ऐसा था, जब यहां प्रवेश के लिए होड़ लगती थी। वर्तमान में वीएफजे स्कूल में चौथी एवं पांचवीं कक्षा में 35 बच्चे पढ़ रहे हैं। यहां तीन शिक्षक हैं। इन बच्चों के सामने नि:शुल्क शिक्षा का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, आयुध निदेशालय (समन्वय एवं सेवाएं) की वीएफजे में बनी फील्ड यूनिट का दावा है कि बच्चों को आसपास के स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। उनके अभिभावकों को इसकी जानकारी दे दी गई है। महिला कल्याण समिति के स्कूलों में पढ़ने का विकल्प दिया गया है। लेकिन, वहां फीस देनी पड़ती है। ओएफके में 56 बच्चें हैं। इनमें पांचवी के 23 बच्चे हैं। वे पास हो जाते हैं, तो संख्या 34 रह जाएगी।
अभी भले ही हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों को सीधे रूप से बंद करने के लिए नहीं कहा गया। लेकिन, संकट यहां पर आएगा। जीसीएफ में संचालित हायर सेकेंडरी स्कूल में 400 बच्चे अध्ययनरत हैं। बीच में सेंट्रल स्कूल के साथ ही जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय से संपर्क किया गया था। लेकिन, उसका कोई निर्णय नहीं हुआ। वीएफजे और ओएफके एस्टेट में संचालित दो प्रायमरी स्कूलों का संचालन अगले सत्र से नहीं किया जाएगा। यहां के बच्चों को आसपास के शासकीय एवं महिला कल्याण समिति के स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। उनके अभिभावकों से सहमति ले ली गई है। शिक्षकों को एस्टेट के स्कूलों में शिफ्ट करेंगे।