अभिनेत्री रेजिना कैसांद्रा ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान पंजाबी और दक्षिण भारतीय लड़की की भूमिका निभाने को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि 9 साल की उम्र से ही उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कर दी थी और पिछले 25 वर्षों में विज्ञापन, लघु फिल्मों और मुख्यधारा की फिल्मों में काम किया है। इंडस्ट्री में अपने सफर को लेकर रेजिना ने कहा कि एक लड़की होने के नाते उन्होंने यहां के तौर-तरीकों को समझा है, लेकिन एक दक्षिण भारतीय कलाकार के रूप में स्थापित होना आसान नहीं रहा।
रेजिना ने खुलासा किया कि जब भी वह हिंदी प्रोजेक्ट्स के लिए ऑडिशन देती हैं, तो सबसे पहले उनकी भाषा पर ध्यान दिया जाता है। लोग यह परखते हैं कि क्या वह साफ हिंदी बोल सकती हैं? उनकी आवाज़ कैसी लगती है? क्या वह हिंदी में सुधार कर रही हैं? यह सब बेहद महत्वपूर्ण होता है। वहीं, जब वह दक्षिण भारतीय किरदार निभाती हैं, तो उनके उच्चारण को स्वीकार कर लिया जाता है। हालांकि, हिंदी बोलते समय उन्होंने अपने दक्षिण भारतीय उच्चारण को कम करने की पूरी कोशिश की।
रेजिना ने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में उत्तर भारतीय अभिनेत्रियों को आसानी से स्वीकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि कई पंजाबी और उत्तर भारतीय अभिनेत्रियों ने तमिल और तेलुगु फिल्मों से करियर की शुरुआत की और बड़े नाम बन गए। लेकिन, दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उसी तरह के अवसर नहीं मिलते।
रेजिना ने यह भी बताया कि उन्होंने कई अहम किरदार सिर्फ इसलिए गंवा दिए, क्योंकि उनकी हिंदी उतनी प्रभावी नहीं थी जितनी लोग उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं पंजाबी लड़की का किरदार नहीं निभा सकती, और यह ठीक भी है। लेकिन एक पंजाबी लड़की दक्षिण भारतीय लड़की का किरदार निभा सकती है।”