नई दिल्ली. तमिलनाडु में संभावित लोकसभा परिसीमन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने जनता से अपील की है कि वे बिना देरी किए परिवार बढ़ाएं। उनका मानना है कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से राज्य का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिससे तमिलनाडु के अधिकारों को नुकसान पहुंचेगा।
स्टालिन का कहना है कि अगर 2026 में परिसीमन हुआ, तो तमिलनाडु की लोकसभा सीटें 39 से घटकर 31 हो सकती हैं। उन्होंने कहा, “पहले हम जनसंख्या नियंत्रण की बात करते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। अब बिना देर किए बच्चे पैदा करना जरूरी हो गया है!”
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री ने 5 मार्च को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इसमें शामिल होने की अपील की, ताकि तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा की जा सके। इस बीच, केंद्र सरकार ने स्टालिन के दावों को खारिज कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी दक्षिण भारतीय राज्य की लोकसभा सीटें कम नहीं होंगी। हालांकि, डीएमके नेता इससे संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि अगर उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें बढ़ती हैं, तो यह दक्षिणी राज्यों के लिए अन्याय होगा।
अब सवाल यह है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को कैसे दूर करेगी? क्या तमिलनाडु में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन और तेज होगा? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने की संभावना है।