मथुरा: होली का पर्व पूरे देश में उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन मथुरा के बरसाना की होली की बात ही अलग है। गुरुवार को श्री राधा रानी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने लड्डू होली और लट्ठमार होली खेलते हुए इस अद्भुत परंपरा को जीवंत कर दिया। बरसाना होली में हिस्सा लेने वाले एक भक्त ने कहा, “यह मेरी छठी बार है जब मैं यहां होली खेलने आया हूं। एक बार जो यहां की होली का आनंद ले ले, वह कहीं और जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता!”
बरसाना होली की अनूठी परंपरा
बरसाना होली से जुड़ी एक प्राचीन कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने अपनी सांवली त्वचा की तुलना राधा जी के गोरे रंग से की, तो वे उदास हो गए। इस पर माता यशोदा ने उन्हें राधा और उनकी सखियों को रंगने की सलाह दी। कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना पहुंचे और राधा व गोपियों पर रंग डालने लगे। इस पर गोपियों ने भी डंडों (लाठियों) से मजाकिया अंदाज में कृष्ण और उनके मित्रों को छेड़ा। यही परंपरा बाद में ‘लट्ठमार होली’ के रूप में प्रसिद्ध हो गई।
बरसाना होली के प्रमुख आकर्षण
1. लड्डू होली- बरसाना होली की शुरुआत राधा रानी मंदिर में लड्डू फेंकने की परंपरा से होती है। श्रद्धालु एक-दूसरे पर प्रसाद रूप में लड्डू उछालते हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और आनंदमय बन जाता है।
2. लट्ठमार होली- इसके बाद गोप और गोपियां रंगों और लाठियों के साथ होली खेलते हैं। गोप जहां राधा जी और उनकी सखियों को रंगने की कोशिश करते हैं, वहीं गोपियां बांस की लाठियों (लट्ठ) से उन्हें मारती हैं। यह नजारा देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। इसके अलावा, मंदिर में भजन-कीर्तन, कीर्तन और श्रीकृष्ण-राधा की लीलाओं का मंचन भी होता है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
विदेशों से भी उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़- बरसाना की होली का आकर्षण केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। इसे देखने और इसमें भाग लेने के लिए विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं। भक्तगण इस अद्भुत परंपरा में डूबकर रंगों और भक्ति का आनंद उठाते हैं। बरसाना होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और परंपरा का संगम है, जो हर साल हजारों भक्तों को श्रीकृष्ण और राधा जी की लीलाओं से जोड़ता है।