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जबलपुर शहर से तकरीबन 32 किलोमीटर दूर नागपुर हाईवे पर एक गांव है महंगवां। इस गांव में रहने वाले लोगों का दर्द यह है कि जब चुनाव आता है तो लोग वोट मांगने तो आ जाते हैं, लेकिन सुविधाओं की बारी आती है तो किसी के दर्शन नहीं होते। इस गांव में अपनी पूरी जिंदगी गुजार देने वाली इंदोबाई कहती है कि उनको प्रदेश के विकास से क्या मतलब जब उनके गांव की सड़क ही नहीं बनी।
रोज खेतों में बकरियों को चराने जाने वाली इंदोबाई कहती है कि उनकी उम्र 74 साल हो चुकी है, लेकिन उन्होंने अपने गांव में पक्की सड़क का मुंह आज तक नहीं देखा। यह पूछे जाने पर की गांव के भीतर तो कुछ पक्की सड़के दिख रही है, तो वह नाराज होकर कहने लगी की पूरा गांव घूम कर देख लोगे तो असलियत का अंदाजा हो जाएगा। वह कहती है कि यहां पर बरसात में कभी आकर देखना तो पता चल जाएगा कि उनका दर्द कितना गहरा है। वह कहती है कि अगर हमारे गांव की थोड़ी सी सड़क बन जाती तो शायद बरसात के दिनों में घरों में कैद रहने की जलालत से बच जाती।
इसी गांव में रहने वाले जागेश्वर कुशवाहा सड़क के किनारे चाट बताशे की दुकान लगाते हैं। वह कहते हैं कि दिन में दुकान लगाकर कुछ पैसा तो कमा ही लेते हैं कि उनके घर की गुजर बसर हो सके। जागेश्वर बताते हैं कि उनके गांव में बिजली भी आती है और लोगों के घर भी बने हैं, लेकिन जो सबसे बड़ी समस्या है वह सड़कों की है। बरसात के दिनों में गांव के अंदर जाने का रास्ता पूरी तरीके से तालाब बन चुका होता है। 