नई दिल्ली। सीरिया में बीते दो दिनों के दौरान हुई घातक हिंसा में 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई है। यह संघर्ष पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों और वर्तमान सरकार के पक्षधर गुटों के बीच भड़क उठा, जिसमें निर्दोष नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह सीरिया के इतिहास की सबसे भीषण हिंसा में से एक मानी जा रही है। हिंसा की शुरुआत गुरुवार को तब हुई जब सरकार समर्थक बंदूकधारियों ने अलवी समुदाय के खिलाफ हमले तेज कर दिए। यह समुदाय पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद का कट्टर समर्थक माना जाता था।
अब तक हुई हिंसा में:
745 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
125 सरकारी सुरक्षा बलों के जवान और 148 असद समर्थक लड़ाके भी मारे गए हैं।
ब्रिटेन स्थित ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ के मुताबिक, हिंसा बढ़ने के बाद प्रशासन ने अलवी बहुल इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बंद कर दी। लताकिया शहर में हालात सबसे अधिक भयावह हो चुके हैं। अलवी बहुल गांवों के निवासियों ने बताया कि उनके घरों को लूटकर आग के हवाले कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़कों पर घुमाया गया और फिर गोली मार दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित इलाका बनियास है, जहां सड़कों और इमारतों की छतों पर शव बिखरे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंदूकधारी लोगों को शवों को दफनाने तक की अनुमति नहीं दे रहे। इस बर्बर हिंसा ने सीरिया को एक बार फिर संकट की आग में झोंक दिया है, और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।