नई दिल्ली/नागपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 साल बाद रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय पहुंचे। यह दौरा संघ की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ। इससे पहले वह 2013 में लोकसभा चुनावों से पहले एक बैठक के लिए यहां आए थे। इस दौरान पीएम मोदी ने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर को श्रद्धांजलि दी।
पीएम मोदी ने माधव नेत्रालय की नई बिल्डिंग की आधारशिला रखते हुए संघ के कार्यों की सराहना की और कहा कि संघ की 100 साल पहले बोई गई राष्ट्रीय चेतना की सोच आज एक विशाल वटवृक्ष बन गई है। उनके इस दौरे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, क्योंकि यह अचानक हुआ और इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतों से जोड़ा जा रहा है।
लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी और संघ के बीच रिश्तों में खटास की खबरें सामने आई थीं। चुनाव में बीजेपी को बहुमत न मिलने के बाद संघ प्रमुख ने बीजेपी की हार के कारणों पर खुलकर बयान दिए थे। हालांकि, संघ की रणनीति से महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में बीजेपी ने फिर से सरकार बनाई। अब खबरें हैं कि बीजेपी और संघ में पार्टी अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद उभर रहे हैं।
संभावित अध्यक्ष उम्मीदवार:
इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि संघ और बीजेपी के बीच अध्यक्ष पद को लेकर कोई सहमति बन सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात में 2029 लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर भी रणनीति बनी। खासकर उत्तर प्रदेश, असम, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल पर फोकस किया गया। यूपी और असम में बीजेपी सरकार बनाने की हैट्रिक लगाना चाहती है, जबकि केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता हासिल करने की योजना है।