मध्य प्रदेश में अप्रेल से बिजली की नई दरें लागू , स्लैब बरकरार, मध्यमवर्गी परिवारों को राहत

By: PalPal India News
March 31, 2025

पलपल इंडिया प्रतिनिधिमध्य प्रदेश में बिजली की नई दरें लागू हो गई हैं इन दरों में आयोग ने 3.46 प्रतिशत औसत दरें बढ़ा दी हैं। करीब 25 लाख मध्यमवर्गीय घरेलू उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, जिनकी मासिक खपत 151 से 300 यूनिट के भीतर रहती है। बिजली कंपनी ने अपने प्रस्ताव में 151 यूनिट के बाद बिजली के फ्लैट दाम तय करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन आयोग ने इसे अस्वीकार कर दिया। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता 58,744 करोड़ और वर्तमान दरों पर प्राप्त राजस्व 54,637 करोड़ बताया। इस अंतर की राशि 4107 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए औसत 7.52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया था। आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 57,732.6 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

मध्य प्रदेश में बिजली अब 3.46% महंगी हो गई। अप्रेल से नई दरें लागू होंगी। राहत यह है कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगे हैं, उन्हें टाइम ऑफ डे का फायदा मिलेगा। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खपत में 20% छूट मिलेगी। वहीं, शाम 5.01 बजे से सुबह 8.59 बजे तक पूरा टैरिफ देना होगा। इनका बिल दो हिस्सों में आएगा।
10 किलोवॉट से अधिक भार वाले घरेलू उपभोक्ता को सुबह 6 से 9 बजे और शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक सामान्य टैरिफ (New Tariff) के मुकाबले 10% अधिक बिल भरना होगा। बिल 3 हिस्सों में आएगा। विद्युत नियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) ने नया टैरिफ जारी किया था। विद्युत मामलों के जानकार जबलपुर के अधिवक्ता राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया, पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 2025-26 में ₹58,744 करोड़ राजस्व की जरूरत बताई। कहा, वर्तमान दरों से 54,637 करोड़ मिल रहा है। भरपाई के लिए औसत 7.52% वृद्धि का प्रस्ताव दिया था।

हर माह बचेंगे 450 रूपए

प्रदेश में 1.27 करोड़ घरेलू उपभोक्ता में से 1 करोड़ को 150 यूनिट खपत पर सब्सिडी मिलती है। इससे 450 रुपए से ज्यादा बचते हैं। वहीं, 25 लाख उपभोक्ताओं की मासिक खपत 151 से 300 यूनिट है। यह स्लैब बरकरार रहने से बोझ नहीं बढ़ेगा।

स्लैब बरकरार, मध्यमवर्गीय को राहत

पावर मैनेजमेंट कंपनियों ने जेब काटने की तैयारी थी। नियामक आयोग को 151 यूनिट+ खपत करने वालों से फ्लैट रेट वसूलने का प्रस्ताव दिया। यह स्लैब हटता तो लाखों मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ता। आयोग ने स्लैब हटाने से मना किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *