नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) बिल, 2025 को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) में आंतरिक घमासान तेज हो गया है। पार्टी के रुख से नाराज़ होकर अब तक पांच प्रमुख नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि पार्टी ने मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वासघात किया है। सबसे ताज़ा इस्तीफा JDU युवा विंग के उपाध्यक्ष तबरेज़ हसन का आया है। इससे पहले अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद शहनवाज़ मलिक, अलीगढ़ के राज्य महासचिव मोहम्मद तबरेज़ सिद्दीकी, भोजपुर के मोहम्मद दिलशान रैन और पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद कासिम अंसारी भी पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं।
हसन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में कहा, “मैंने उम्मीद की थी कि आप अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को कायम रखेंगे, लेकिन आपने उन ताकतों का साथ दिया जो लगातार मुसलमानों के खिलाफ नीतियाँ बना रहे हैं।” उन्होंने इस बिल को अनुच्छेद 370 हटाने, ट्रिपल तलाक कानून और CAA जैसे फैसलों की कड़ी बताया। हसन का दावा है कि उन्होंने पार्टी को इस बिल के खिलाफ उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में ज्ञापन सौंपा था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अपने इस्तीफे को उन्होंने “नई जिम्मेदारी की ओर पहला कदम” बताया।
वक्फ बिल पर समर्थन को लेकर सिर्फ JDU ही नहीं, बल्कि NDA की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) में भी असंतोष की लहर उठ रही है। यूपी में RLD के राज्य महासचिव शहजैब रिजवी ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए जयंत चौधरी पर धर्मनिरपेक्षता से समझौते का आरोप लगाया। हापुड़ से महासचिव मोहम्मद जाकी समेत कई अन्य स्थानीय नेताओं ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। जाकी ने कहा, “अब पार्टी नेतृत्व जनहित नहीं, बल्कि सत्ता की राजनीति को प्राथमिकता दे रहा है।”
राज्यसभा में शुक्रवार देर रात वक्फ संशोधन बिल पास हुआ। बिल के पक्ष में 128 वोट पड़े, जबकि 95 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इससे पहले लोकसभा में 288 ने समर्थन और 232 ने विरोध किया था। भले ही संसद से बिल पारित हो चुका है, लेकिन बिहार चुनाव से पहले यह मसला NDA के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।