खून के इंफेक्शन और एनीमिया का पता लगाने के लिए RRI के वैज्ञानिकों ने तैयार की नई डिवाइस, ट्यूमर का भी लगेगा पता

By: PalPal India News
April 9, 2025

पलपल इंडिया प्रतिनिधिभारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई सफल खोज की है, टीम ने एक नई डिवाइस का विकास किया है, जो खून के इंफेक्शन और एनीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्रता से पता लगाने में मदद कर सकती है।

मेडिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस डिवाइस के माध्यम से उपयोगकर्ता बिना किसी दर्द के तेजी से अपने खून की स्थिति की जाँच कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल समय की बचत करती है, बल्कि समाज के उन वर्गों के लिए भी बड़ी सहूलियत है, जिन्हें नियमित रक्त परीक्षण करवाने में कठिनाई होती है। इस तकनीक का नाम RRI (राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी) रखा गया है, भारत में एनीमिया से लड़ने के लिए 2018 में ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की गई थी। देश में सभी उम्र के लोगों में एनीमिया की समस्या लगातार सामने आ रही है। इसी दिशा में, बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक नवीनतम डिवाइस को लॉन्च किया है जो खून के संक्रमण और एनीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जल्दी और प्रभावी ढंग से पता लगा सकता है। इस डिवाइस के माध्यम से लोगों को अपनी सेहत की जानकारी आसानी से मिल सकेगी, जिससे वे समय पर आवश्यक उपचार करा सकेंगे। यह तकनीक देश में एनीमिया और संबंधित खतरनाक बीमारियों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना को बढ़ावा देती है। इस नवाचार से निश्चित रूप से लोगों को बीमारियों की रोकथाम और उचित देखभाल के लिए नए अवसर मिलेंगे, और यह भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

सिकल सेल बीमारी एक आनुवांशिक रक्त विकार है, जो मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। यह बीमारी विशेष रूप से उन लोगों में अधिक आम है, जिनकी आनुवांशिक पृष्ठभूमि अफ्रीकी, मध्य पूर्वी और दक्षिण एशियाई है। सिकल सेल बीमारी का कारण एक आनुवांशिक म्यूटेशन होता है, जिसके परिणामस्वरूप रक्त में हेमोग्लोबिन का एक विशेष प्रकार बनता है। यह हेमोग्लोबिन सामान्य आकार के बजाय “सिकल” या चंद्राकार में बदल जाता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है।

एनीमिया की शिकायत होती है. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक में एनीमिया के काफी केस सामने आते हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक (2019-21) के में, पुरुषों (15-49 वर्ष) में 25.0 प्रतिशत और महिलाओं (15-49 वर्ष) में 57.0 प्रतिशत है. लड़कों (15-19 वर्ष) में 31.1 प्रतिशत, लड़कियों में 59.1 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं (15-49 वर्ष) में 52.2 प्रतिशत और बच्चों (6-59 महीने) में 67.1 प्रतिशत एनीमिया के केस है.

एनीमिया से लड़ने में करेगा मदद

डिवाइस का यह इनोवेशन राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के मिशन का समर्थन कर सकता है, जिसके जरिए केंद्र का लक्ष्य 2047 तक एससीडी को खत्म करना है. एससीडी एक जीन उत्परिवर्तन(Gene mutation) है जो रेड बल्ड सेल के सख्त होने की वजह से गंभीर समस्या पैदा करता है, जिससे दुनिया भर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं, जिनमें ग्रामीण भारत के कई लोग भी शामिल हैं. आरआरआई ने कहा, हाई-प्रदर्शन तरल क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी) जैसे मौजूदा ​​डिवाइस बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के लिए महंगे हैं.

ट्यूमर का भी लगेगा पता

आपको बता दें,कि आरआरआई ने कहा कि पोर्टेबल और लागत प्रभावी डिवाइस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के लिए विशेष रूप से कामगर साबित हो सकता है, इससे संभावित रूप से एससीडी का पहले ही पता लगाया जा सकता है. एससीडी स्क्रीनिंग से परे यह ट्यूमर सेल का पता लगाने, पशु में बल्ड की बीमारी जैसी चीजों में भी अहम रोल निभा सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *