नई दिल्ली. तुर्की सरकार ने निजी अस्पतालों में ‘इलेक्टिव सिजेरियन डिलिवरी’ यानी बिना ठोस मेडिकल वजह के की जाने वाली सी-सेक्शन डिलिवरी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब महिलाएं अपनी मर्जी से सिजेरियन डिलिवरी का विकल्प नहीं चुन पाएंगी। सरकार का कहना है कि यह कदम मातृत्व को प्राकृतिक तरीके से बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन महिला अधिकार कार्यकर्ता और विपक्षी नेता इसे महिला स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मान रहे हैं।
हाल ही में एक फुटबॉल मैच के दौरान सिवासपोर क्लब के खिलाड़ी “नॉर्मल डिलिवरी ही प्राकृतिक है” लिखे पोस्टर के साथ मैदान में उतरे। यह पोस्टर स्वास्थ्य मंत्रालय का था और इसका उद्देश्य सिजेरियन की बजाय सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करना था। इस पहल की आलोचना करते हुए विपक्षी पार्टी सीएचपी की नेता गोकचे गोकचन ने कहा, “अब पुरुष फुटबॉलर महिलाओं को बताने लगे हैं कि उन्हें कैसे बच्चे पैदा करने चाहिए। यह महिला की निजी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”
राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने 2025 को “परिवार वर्ष” घोषित किया है और देश में गिरती प्रजनन दर को राष्ट्रीय संकट बताया है। तुर्की की प्रजनन दर 2023 में घटकर 1.51 तक पहुंच गई, जो 1960 में 6.5 थी। इस गिरावट को रोकने के लिए सरकार नई योजनाएं लागू कर रही है, जिनमें युवा जोड़ों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
एर्दोआन लंबे समय से सिजेरियन डिलिवरी के विरोध में हैं। 2012 में उन्होंने इसे जनसंख्या नियंत्रण का एक षड्यंत्र बताया था। उसी साल तुर्की पहला देश बना, जिसने बिना मेडिकल ज़रूरत के सिजेरियन कराने की सलाह देने वाले डॉक्टरों के लिए दंडात्मक कानून लागू किया।
हालिया फैसले से यह स्पष्ट है कि तुर्की सरकार प्राकृतिक प्रसव को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह महिला की शरीर पर उसके अधिकारों को सीमित करने वाला कदम है।