भारत ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध और सलाल बांध को किया बंद, अब होगा पकिस्तान पानी-पानी को मोहताज़

By: PalPal India News
May 5, 2025

पलपल इंडिया प्रतिनिधि। भारत ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध और सलाल बांध को बंद कर दिया है। सलाल बांध के गेट बंद होने के बाद से चिनाब नदी के जलस्तर में काफी गिरावट देखने को मिली है, जिसका वीडियो भी सामने आया है। सिंधु जल समझौते के सस्पेंशन के बाद भारत के इस कदम से पाकिस्तान पानी-पानी के लिए मोहताज हो जाएगा।

पहलगाम में हुई आतंकी हमले के बाद से भारत की ओर से लगातार पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन जारी है। सबसे पहले भारत ने सिंधु जल संधि को खत्म करते हुए पाकिस्तान जाने वाले सिंधु नदी के पानी को रोक दिया। वहीं अब चिनाब नदी के पानी को भी भारत ने रोक दिया है। भारत ने चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध और सलाल बांध को बंद कर दिया है। वहीं अब बांध बंद होने के बाद यहां से आने जाने वाली नदी पूरी तरह से सूख गई है, जिसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो भी देखा जा सकता है कि चिनाब नदी का जलस्तर काफी गिर गया है। इसके साथ ही रामबन और डाउनस्ट्रीम में चिनाब नदी का तल पूरी तरह सूख गया है। इससे पाकिस्तान में पानी का संकट और बढ़ गया है। सूत्रों ने बताया कि बगलिहार बांध में पर्याप्त जलभराव बनने में करीब तीन दिन लगते हैं। पुल डोडा से आगे, बटोटे-किश्तवाड़ रोड पर डोडा जिले के प्रेम नगर कस्बे के पास एक बड़ी झील बन जाती है।

सलाल डैम के सभी गेट बंद

दरअसल, जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में सलाल डैम बना हुआ है। यह डैम चिनाब नदी पर बनाया गया है। वहीं भारत ने सलाल डैम के सभी गेट्स को बंद कर दिया है। सलाल डैम के सभी गेट बंद होने के बाद रियासी जिले में चिनाब नदी के जलस्तर में काफी गिरावट देखने को मिली है। चिनाब नदी कई जगहों पर सूख गई है। बता दें कि इससे पहले भारत ने चिनाब नदी पर बगलिहार बांध (Baglihar Dam) से पानी के प्रवाह को रोक दिया था। वहीं अब भारत झेलम नदी पर बने किशनगंगा बांध पर भी इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

पानी रुकने से सूखी नदी

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत ने सबसे पहले सिंधु नदी पर बने बांध को बंद कर दिया था। भारत ने तत्काल प्रभाव से सिंधु जल समझौते को खत्म कर दिया था। बता दें कि विश्व बैंक द्वारा ये सिंधु जल संधि की गई थी। इस संधि पर 1960 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इसे अक्सर दो शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों के बीच शांतिपूर्ण सहयोग के एक दुर्लभ उदाहरण के रूप में सराहा जाता है। लेकिन अब पकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने यह बड़ा कदम उठाया है

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