पलपल इंडिया प्रतिनिधि। साइबर अपराधी अब नई तकनीक का इस्तेमाल कर फ्रॉड कर रहे है , इस तकनीक में फोटो-वीडियो डाउनलोड करते ही फोन हैक हो सकता है। अपराध शाखा ने एडवाइजरी जारी कर यूजर्स को सावधान रहने की सलाह दी है। अनजान नंबरों से आने वाले फोटो और वीडियो डाउनलोड करने से बचने की जरूरत है।
साइबर अपराधियों के लिए इंटरनेट मीडिया (वॉट्सएप-इंस्टाग्राम) ठगी का सबसे आसान अड्डा है। वाट्सएप यूजर्स बगैर सोचे-समझे अनजान नंबरों से आने वाले फोटो और वीडियो डाउनलोड कर लेते हैं। ऐसी लापरवाही अब बैंक खाता खाली करवा रही है। फोटो-वीडियो डाउनलोड करने के शौकीन साइबर अपराध का शिकार बन सकते हैं। अपराधी अब धोखाधड़ी के लिए स्टेगनोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। धोखाधड़ी की घटनाओं को देखते हुए अपराध शाखा ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें साइबर अपराधी और स्कैमर वॉट्सएप पर ब्लर फोटो और वीडियो भेजता है। यूजर जैसे ही उस पर क्लिक करता है, उसका फोन हैक हो जाता और बैंक की निजी जानकारी और उसका डेटा स्कैमर के पास चला जाता है।
स्कैमर वॉट्सएप पर भारतीय सेना और हिंदू देवी-देवताओं के फोटो और वीडियो भेज कर फोन हैक कर सकते हैं। दरअसल स्कैमर द्वारा फोटो (फाइल) के साथ में हिडन मेलवेयर छिपा रहता है, जो फाइल पर क्लिक करते ही सक्रिय हो जाता है और यूजर के फोन का एक्सेस उसके हाथ में चला जाता है। एडीसीपी के मुताबिक इस फ्राड से बचने के लिए यूजर को वाट्सप पर मीडिया विजिबिलिटी ऑप्शन ऑफ कर लेना चाहिए। इससे ऑटो डाउनलोडिंग बंद हो जाती है।
एडीसीपी के अनुसार हाल में मिली शिकायतों में पीड़ितों ने बताया कि उनके खाते से रुपये निकल रहे हैं। उन्होंने न ओटीपी बताया न किसी से जानकारी साझा की। जांच में पता चला उनके द्वारा अनजान नंबर से आई फोटो डाउनलोड की गई थी। इस कारण उनके फोन में ओटीपी तक नहीं आया। स्कैमर ने उसका फोन हैक कर लिया था। इस कारण ओटीपी भी स्कैमर के पास पहुंच रहा था। राज्य साइबर सेल के एसपी सव्यसाची सराफ के मुताबिक स्टेगनोग्राफी का पता लगाना बहुत कठिन है। अनजान नंबरों से आने वाले मैसेज, ऑडियो, वीडियो और फोटो को डाउनलोड करने से बचना चाहिए। फोन में एंटी वायरस और सिक्योरिटी एप इंस्टाल करें। धोखाधड़ी की घटना होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।