नई दिल्ली। भारत ने एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाते हुए अपनी सबसे उन्नत हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली “एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी – लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल” के परीक्षण की तैयारी कर ली है। यह परियोजना ‘विष्णु’ का हिस्सा है और इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से लगभग 8 गुना तेज यानी मैक 8 (लगभग 11,000 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ान भर सकती है और 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। इसकी इतनी तेज गति है कि दुश्मन के रडार भी इसे पकड़ नहीं सकते।
1 सेकंड में 3 किमी दूरी तय करने की क्षमता।
दुश्मन की रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए लगभग अदृश्य।
हवा, जमीन और समुद्र – तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है।
स्क्रैमजेट इंजन तकनीक से लैस, जो हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है, जिससे यह लंबे समय तक हाइपरसोनिक गति बनाए रखती है।
साल 2025 में इसका 1000 सेकंड का सफल ग्राउंड टेस्ट हो चुका है।
कम ऊंचाई (Low Altitude) पर उड़ने की क्षमता, जिससे यह रडार से बच निकलती है।
दिशा बदलने में सक्षम – दुश्मन की मिसाइल डिफेंस को चकमा देने में कारगर।
2,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सहने वाला खास मटेरियल, जो इसे जलवायु के अनुसार बेहद टिकाऊ बनाता है।
1000–2000 किलोग्राम तक पारंपरिक या परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता – इसे सामरिक और रणनीतिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयुक्त बनाता है।