नई दिल्ली. मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य संघर्ष का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका को आशंका है कि इजराइल कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है। इसी बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों और सैन्य कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इराक में तैनात कुछ कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। साथ ही, पेंटागन ने पूरे मध्य पूर्व में तैनात अपने सैन्य कर्मियों के परिवारों को वहां से सुरक्षित निकलने की हरी झंडी दे दी है।
इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की संभावना अब पहले से बहुत कम है। उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में कहा,
“मुझे अब कुछ महीने पहले की तुलना में समझौते की उम्मीद बहुत कम नजर आती है।”
ट्रंप का कहना था कि वे ईरान के साथ एक ऐसा समझौता चाहते थे जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके, ताकि मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष से बचा जा सके। लेकिन अब हालात तेजी से विपरीत दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इजराइल संभवतः बिना अमेरिका को जानकारी दिए, ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीधा हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही नाजुक परमाणु वार्ता पूरी तरह विफल हो सकती है। साथ ही, ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य हितों पर जवाबी कार्रवाई की आशंका भी बेहद प्रबल है।
ट्रंप ने कहा कि कुछ अमेरिकी कर्मियों को सुरक्षा कारणों से मध्य पूर्व से हटाया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा,
“हमने चेतावनी दे दी है। देखना होगा आगे क्या होता है, लेकिन ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना सकता।”
अमेरिका की सक्रिय तैयारियों और इजराइल की संभावित आक्रामक रणनीति के चलते मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में बढ़ते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।