नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था FATF (Financial Action Task Force) ने एक अप्रत्याशित और सख्त प्रतिक्रिया दी है। यह पहली बार है जब FATF ने भारत में किसी आतंकी हमले पर इस तरह की सीधी और सार्वजनिक नाराजगी जताई है। अपने बयान में FATF ने कहा,
“ऐसे हमले तब तक संभव नहीं होते जब तक आतंकियों को फंडिंग और धन के प्रवाह के साधन उपलब्ध न हों।” अपने वक्तव्य में FATF ने ‘Strengthening Efforts to Combat Terrorist Financing’ शीर्षक के तहत यह साफ किया कि अब केवल कागजी कानूनों और औपचारिक व्यवस्थाओं से बात नहीं बनेगी, बल्कि वे जमीनी स्तर पर उठाए गए ठोस कदमों की भी बारीकी से जांच करेंगे। यह एक स्पष्ट संदेश है कि आतंकी फंडिंग को रोकने के दावों की अब वास्तविकता भी परखी जाएगी।
भारत ने हाल ही में FATF के सदस्य देशों के साथ महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां साझा की हैं, जिनमें पाकिस्तान से जुड़े आतंकी फंडिंग नेटवर्क का विस्तार से उल्लेख है। भारत का कहना है कि भले ही पाकिस्तान 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर हो गया हो, लेकिन उसके यहां आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं, जो कानूनी लबादे में छिपे हुए हैं।
पहलगाम में हुए इस हमले सहित, जम्मू-कश्मीर में हाल के अन्य आतंकी हमलों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि सीमा पार से धन और संसाधनों का प्रवाह आज भी जारी है। भारत ने FATF के सामने एक नया डोज़ियर पेश किया है, जिसमें वर्चुअल करेंसी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से आतंकी फंडिंग के नेटवर्क को ट्रैक किया गया है।
FATF अब यह देखने पर बल दे रहा है कि देश सिर्फ कानून बनाकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, उन्हें आतंकी फंडिंग रोकने के लिए प्रभावी और ठोस कार्रवाई करनी होगी। भारत इस स्थिति को एक राजनयिक अवसर के रूप में देख रहा है और पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सक्रिय हो गया है।