palpalindianews/jabalpur
झारखंड के सिमडेगा जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर पिथरा पंचायत के छोटे से गाँव बड़कीछापर के उबड़-खाबड़ मैदान पर हाथ से बनी बांस की स्टिक व बॉल से सलीमा ने हॉकी खेलना शुरू किया था।
भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी सलीमा का परिवार आज भी गाँव में मिट्टी के मकान में रहता है। उसके पिता सुलक्सन टेटे और भाई खेत में खुद से हल-जोतकर अन्न उपजाते हैं। माँ एक रसोइयां के तौर पर काम करती हैं।
सलीमा जिले की पहली बेटी है, जिसने यहाँ तक का सफर तय किया है। वह 2016 में पहली बार जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए चुनी गयीं और इसी साल अंडर 18 एशिया कप के लिए जूनियर भारतीय महिला टीम में उनको उपकप्तान बनाया गया था। 2016 नवंबर में सीनियर महिला टीम के लिए सलीमा चुनी गईं थीं और पहली बार देश से बाहर आस्ट्रेलिया खेलने गईं थीं।
2019 यूथ ओलंपिक में वो जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान बनीं। इस साल टीम सिल्वर मेडल जीतकर लौटीं। 2019 में ही उनकी प्रतिभा का लोहा मानते हुए हॉकी बोर्ड ने उनका चयन सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में स्थायी खिलाड़ी के तौर पर किया। तब से लेकर आज तक सलीमा टेटे कई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में झारखंड और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय टीम की ओर से खेलती रही हैं।
2021 में जब वह ओलंपिक में खेल रहीं थीं, तो उनके घर में टीवी सेट भी नहीं था कि घर वाले उनको देख पाते। उन्होंने काफ़ी संघर्ष से अपनी सफलता की कहने लिखी है और आज किसी को भी प्रेरित करने का दम रखती हैं।