जबरन कपड़े उतारना भी माना जाएगा बलात्कार की कोशिश: इलाहाबाद हाई कोर्ट

By: PalPal India News
July 4, 2025

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी महिला के जबरन कपड़े उतारना और यदि वह कृत्य बलात्कार की नीयत से किया गया हो, तो उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 511 के तहत ‘बलात्कार का प्रयास’ माना जाएगा। यह टिप्पणी जस्टिस रजनीश कुमार की सिंगल बेंच ने दी, जिन्होंने आरोपी प्रदीप कुमार की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 10 साल की सजा को बरकरार रखा।

मामला: महिला को अगवा कर 20 दिन तक बंदी बनाकर रखा
यह केस वर्ष 2004 का है, जिसमें आरोपी प्रदीप कुमार ने एक महिला को जबरन अगवा कर एक रिश्तेदार के घर में लगभग 20 दिनों तक बंदी बनाकर रखा। इस दौरान उसने पीड़िता के कपड़े उतारकर बलात्कार करने की कोशिश की, लेकिन महिला के कड़े विरोध के चलते वह अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सका।

कोर्ट की टिप्पणी: साफ तौर पर दुष्कर्म का प्रयास
कोर्ट ने माना कि आरोपी की नीयत स्पष्ट रूप से दुष्कर्म की थी। पीड़िता के बयान को विश्वसनीय मानते हुए कहा गया कि उसने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि आरोपी ने “गलत हरकतें कीं और कपड़े उतार दिए”, लेकिन उसके प्रतिरोध की वजह से बलात्कार नहीं हो सका। यह कार्य बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का भी हवाला दिया, जिनमें यह स्पष्ट किया गया है कि यदि आरोपी बलात्कार की नीयत से महिला के कपड़े उतारता है, तो यह कृत्य सिर्फ छेड़छाड़ नहीं, बल्कि दुष्कर्म की कोशिश माना जाएगा — भले ही वह उसमें सफल न हो।

एफआईआर में देरी पर भी कोर्ट का सख्त रुख
आरोपी के वकील ने एफआईआर में हुई देरी को आधार बनाकर मामला कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता और उसके परिवार द्वारा देरी के दिए गए कारण उचित हैं। ऐसे मामलों में यदि अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य पेश कर देता है, तो एफआईआर में देरी न्याय के आड़े नहीं आती।

झूठे फंसाने का दावा भी खारिज
प्रदीप कुमार ने यह दावा किया कि पीड़िता के साथ उसके पहले से संबंध थे और उसे झूठे आरोप में फंसाया गया है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपी इस संबंध में कोई भी पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं कर सका। जो पत्र उसने कोर्ट में दिए, उन्हें पीड़िता ने अपना मानने से इनकार कर दिया। ऐसे में झूठे फंसाने की दलील भी अस्वीकार कर दी गई।

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