गोवर्धन की पूजा शोभन योग में की जाएगी और भगवान श्रीकृष्ण का अन्नू कूट का भोग लगेगा।भगवान कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए द्वापर युग में गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्रदेव के घमंड के चलते ब्रजवासियों को परेशान करने के लिए पूरे गांव को तूफान और बारिश का प्रकोप सहना पड़ा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी, तब से ही गोवर्धन की पूजा हर साल की जाने लगी।
अन्नकूट शब्द का अर्थ अन्नों का मिश्रण होता है।गोवर्धन की पूजा के लिए कढ़ी,दाल,चावल,पापड़,रोटी , मिक्स सब्जी, आम चटनी, पूड़ी, रोटी, गाजर हलवा, भात, रायता, मूंग की खिचड़ी, बाजरे का हलवा बनाया जाता है। भगवान कृष्ण का भोग लगाने के लिए इन सभी पकवान का मिश्रण किया जाता है जिसमें हरी सब्जी,बेर,मूंग की पली, आदि मिलाई जाती है।जिसे अन्नकूट कहते हैं असल में जब पर्वत के नीचे सात दिन तक बृजवासी रहे तो उन्होंने अपनी भूख मिटाने के लिए फल और अन्न के मिश्रण को मिलबांटकर खाते थे तथा भगवान श्रीकृष्ण को खिलाते थे।