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पांच दशक पहले लखनऊ की सड़कों में लाउड स्पीकर लिए एक शख़्स यह घोषणा कर रहा था। सड़कों पर घूमते हुए ऑटो रिक्शा में बैठे इस व्यक्ति का नाम था महेंद्र कुमार शर्मा। यह वही थे जिन्होंने आगे चलकर भारत में महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी थी। शर्मा के इस प्रचार अभियान को सुनकर लगभग 200 लोग उत्सुकता से मैच देखने आए थे। और यह देखने भी कि लड़कियाँ स्कर्ट पहनकर खेलती हैं या पुरुषों की तरह पैंट पहनकर! यह भारत में महिला क्रिकेट के शुरुआती दिनों का किस्सा है..
भारत में महिला क्रिकेट का यह पहला मैच लखनऊ के महारानी एंग्लो संस्कृत कॉलेज के छोटे से मैदान में खेला गया। टूर्नामेंट की कल्पना महेंद्र कुमार शर्मा ने की थी, जो भारत में महिला क्रिकेट के लिए एक संगठन बनाना चाहते थे। संगठन बनाने से पहले वो टीम के लिए खिलाड़ियों का चयन करना चाहते थे और इसी के लिए वीकेंड में मैच रखा गया था।
इसके बाद शर्मा ने महिला क्रिकेट को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की और महिला क्रिकेट असोसिएशन ऑफ इंडिया (WCAI) 1973 में अस्तित्व में आई। 2006 में WCAI का विलय BCCI में हुआ। महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए फिर कई कार्यक्रम आयोजित किए और देश को डायना एडुल्जी, पहली कप्तान शांता रंगास्वामी और सुधा शाह जैसी बढ़िया क्रिकेटर्स मिलीं। ये सभी अपने ज़माने में लोकप्रिय खिलाड़ी थीं। अप्रैल 1973 में, पहली महिला अन्तर-स्टेट राष्ट्रीय प्रतियोगिता पुणे में आयोजित की गई थी, जिसमें तीन टीमों, बॉम्बे, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने हिस्सा लिया था। स्टेट लेवल पर पांच साल के सफल कार्यकाल के बाद, पहली द्विपक्षीय महिला क्रिकेट सीरीज़ 1975 में भारत में खेली गई और तीन मैचों की इस टेस्ट सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया अंडर-25 टीम भारत आई थी। यह तस्वीर उसी वक़्त की है, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ ऑस्ट्रेलिया और भारत की टीमों को देखा जा सकता है।
यह सीरीज़ पुणे, दिल्ली और कलकत्ता शहरों में खेली गई और दिलचस्प बात यह है कि तीन टेस्ट मैचों के लिए भारतीय टीम की तीन कप्तान भी रहीं- उज्वला निकम, सुधा शाह और श्रीरूपा बोस। ऑस्ट्रेलिया की इस सीरीज़ के बाद, भारत ने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ कई इंटरनेशनल मैच खेले। आज महिला क्रिकेट टीम किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। अपनी मेहनत और लगन से देश की महिलाओं ने यह साबित किया है कि क्रिकेट का खेल केवल पुरुषों तक ही सीमित नहीं।