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26/11 हमला: 2008 में मुंबई हमले की शिकार बच्ची देविका की अद्भुत कहानी
2008 में नवंबर महीने में, जब मुंबई में आतंकियों ने हमला किया, तब देविका रोतावन सिर्फ नौ साल की थीं. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, हमलावरों ने उन्हें पैर में गोली मार दी थी.
उसके बाद, एकमात्र जीवित हमलावर को अदालत में पहचाना गया था, लेकिन उसने अपनी ज़िंदगी को मजबूती से जीने का निर्णय लिया.
पंद्रह सालों बाद, मैंने देविका से मुलाकात की, जहां उसने बताया कि उसकी ज़िंदगी कैसे बदल गई है. इस युवा स्वरूपी की कड़ी मेहनत, साहस, और सकारात्मकता ने उसे आतंकवाद के प्रति अपनी संघर्षी भूमिका का सामर्थ्य दिखाया है।
देविका रोतावन की इस कहानी से हमें मिलता है कि उम्मीद और साहस के साथ, कोई भी मुश्किल हो पार की जा सकती है और ज़िंदगी को नई दिशा देने का साहस हमेशा मौजूद है।