बिलकिस बानो ने कहा कि जब 15 अगस्त 2022 गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों को रिहा किया गया तो मैं हैरान रह गई थी. मैं डर गई थी और अंदर से टूट गई थी. लेकिन इस मुश्किल वक्त में कई ऐसे लोग थे, जिन्होंने मेरा हौंसला बढ़ाया, जिसके बाद मैंने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL (जनहित याचिका) दायर की. बता दें कि बिलकिस बानो की याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने लगातार 11 दिनों तक सुनवाई की और 12 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोषियों की रिहाई को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि जिन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली थी, उन्हें समय से पहले कैसे रिहा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उन्हें रिहा किया गया तो ये साफ होना चाहिए कि आखिर उन्हें किस आधार पर सजा में माफी दी गई.
बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विपक्ष ने भी खुशी जताई और गुजरात सरकार पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा कि चुनावी फायदे के लिए ‘न्याय की हत्या’ की प्रवृत्ति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. प्रियंका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा की महिला विरोधी नीति सामने आ गई है. कोर्ट के फैसले के बाद जनता का कोर्ट पर भरोसा मजबूत होगा. बिलकिस बानो के संघर्ष के लिए प्रियंका गांधी ने उन्हें बधाई भी दी.
वहीं, AIMIM के चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई और कहा कि बिलकिस बानो का गैंगरेप हुआ, उनकी बेटी की हत्या की गई. ओवैसी ने कहा कि लोगों को याद रखना चाहिए कि दोषियों की रिहाई पर भाजपा नेताओं ने खुशी जताई थी और रिहा किए गए दोषियों को फूलों की माला पहनाई थी.