युवती के हाथ-पैर में मिल रहे चीरा-घाव, चिकित्सक बोले यह मानसिक विकार है

By: PalPal India News
June 6, 2024

MP News: युवती के हाथ-पैर में मिल रहे चार से पांच चीरा-घाव, चिकित्सक बोले यह मानसिक विकार है

पलपल इंडिया प्रतिनिधि दमोह  मध्‍य प्रदेश के दमोह जिला में सामने आया अजीबोगरीब मामला, युवती के शारीर में मिल रहे चार से पांच चीरा-घाव डाक्‍टरों का कहना है कि कई बार कुछ लोग इस तरह की मानसिक वृत्ति का शिकार हो जाते है , और मानसिकरूप से स्वस्थ नहीं होने पर वह स्वयं के शरीर को क्षति पहुचातें है। वह यह सब अटेंशन पाने के लिए करते है। इसी तरह का एक मामला दमोह जिले से आया है, एक युवती अजीबोगरीब समस्या से पीड़ित है। दमोह जिले के गैसावाद थाना क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय युवती के हाथ-पैर में प्रतिदिन चार से पांच नए घाव मिल रहे है, जैसे चाकू,ब्लेड या किसी नुकीली धारादार वस्तु से युवती ने खुद को घाव दिए हैं।

मुहन्ना गांव की निवासी पीड़िता कृष्णा का कहना कि यह सब 20 से 25 दिनों से चल रहा है। अभी तक युवती के हाथ-पैर में 100 से अधिक घाव हो चुके है। इस घटना से पीड़िता के परिवार वाले भी हैरान है। डाक्‍टरों का कहना है कि युवती किसी मानसिक विकार से पीड़ित है। घटना का पता लगने के बाद जिले के महिला बाल कल्याण एवं विकास विभाग ने युवती की जांच कराने का निर्णय किया है।

मनो चिकित्सक का कहना है कि यह अटेंशन सीकिंग डिसआर्डर हो सकता है-

मनो चिकित्सक विशाल शुक्ल का कहना है कि युवती को अटेंशन सीकिंग डिसऑर्डर हो सकता है। वह अन्य को साइकोलाजिकल डिसऑर्डर से भी पीड़ित हो सकती है। गहरे घाव का भी तुरंत उपचार होना चाहिए। अन्य किसी भी दावें या तथ्य को विज्ञान के इस युग में स्वीकार करना संभव नहीं है।

– डाक्‍टर विशाल शुक्ला, आरएमओ, जिला अस्पताल, दमोह

यह फैक्टीसियस डिसऑर्डर  हो सकता है-

मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होने पर कई बार मरीज खुद के शरीर को क्षति पहुंचाता है। वह अटेंशन पाने के लिए यह करता है। उसे अपने आप को जानबूझकर बीमार या चोटिल दिखाकर, दूसरे को परेशान होते देखकर अच्छा लगता है। यह फैक्टीसियस डिसऑर्डर का लक्षण होता है। डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर भी हो सकता है। वह डिप्रेशन या किसी अन्य मनोविकार से भी पीड़ित हो सकती है। पीड़ित की जांच और काउंसिलिंग के बाद ही उचित कारण का पता लगाया जा सकता है। लेकिन ऐसे मामले में शीघ्र मनोरोग चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

– डाक्‍टरों ओपी रायचंदानी, प्रमुख, मनोचिकित्सा विभाग, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज

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