जबलपुर समाचार :क्राइस्ट चर्च स्कूलों के प्राचार्य-सचिव सस्पेंड
क्राइस्ट चर्च स्कूलों के प्राचार्य-सचिव सस्पेंड। पुलिस ने प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर उक्त दस्तावेजों में मिले साक्ष्यों का मिलान किया। आइएसबीएन नंबर जांचे तो स्कूलों का फर्जीवाड़ा सामने आया। प्रशासन के बाद पुलिस की जांच में भी सिद्ध हुआ है कि स्कूल संचालकों किस प्रकार फर्जी किताबों के जरिए शिक्षा दे रहे थे और मनमानी फीस की वसूली कर रहे थे।
जबलपुर के निजी स्कूलों की अवैध फीस वसूली और किताबों पर कमाए गए अवैध कमीशन के खिलाफ कार्रवाई का दौर जारी है। गिरफ्तार क्राइस्ट चर्च फॉर ब्वायज एंड गर्ल्स के प्राचार्य शाजी थॉमस, क्राइस्ट चर्च फॉर ब्वायज सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल सिविल लाइंस की प्राचार्य एलएम साठे, सदस्य अतुल अनुपम इब्राहिम और एकता पीटर, क्राइस्ट चर्च सालीवाड़ा के प्राचार्य क्षितिज जैकब और मैनेजर नीलेश सिंह व क्राइस्ट चर्च जबलपुर डायसेशन स्कूल सीएमएस कंपाउंड के मैनेजर ललित सालोमन को निलंबित किया गया है। निलंबन की कार्रवाई चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के जबलपुर डासोसिस ने की है।
सीएनआइ की जांच में इन्हें टर्मिनेट भी किया जा सकता है। इसके पूर्व सीएनआइ द्वारा क्राइस्ट चर्च स्कूलों के चैयरमैन अजय उमेश जेम्स को भी निलंबित किया जा चुका है। मामले की जांच के लिए सीएनआइ की एक तीन सदस्सीय टीम दिल्ली से जबलपुर आई थी। इसमें पुणे के बिशप शामिल थे। इस मामले में अपने बेटे क्षितिज जैकब को बचाने के लिए उसका पिता सुरेश जैकब भी पहुंचा था।
सुरेश जैकब पूर्व में बर्खास्त बिशप पीसी सिंह का करीबी था और ईडी और ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जानकारी के अनुसार क्षितिज क्राइस्ट चर्च ब्वायज स्कूल में क्लर्क था, लेकिन पिता सुरेश के बर्खास्त बिशप पीसी सिंह के करीबी होने का उसे फायदा मिला और उसे सालीवाड़ा क्राइस्ट चर्च का प्राचार्य बनाया गया था।
क्राइस्ट चर्च फॉर बॉयज एंड गर्ल्स (आइ एस सी) की किताबों की जांच की, तो पता चला कि नर्सरी से लेकर चौथी, छटवीं और सातवीं की शत प्रतिशत किताबें फर्जी थीं। वहीं पांचवी और आठवीं की 89 प्रतिशत, नवमीं की 67 प्रतिशत, दसवीं की 60 प्रतिशत, 11वीं की 82 प्रतिशत और 12 वीं की 76 प्रतिशत किताबें फर्जी निकलीं। क्राइस्ट चर्च स्कूल कोएड सालीवाडा में सीनियर केजी से लेकर पांचवी, नवमीं, दसवीं, 11 कॉमर्स और 12 वीं साइंस की शत प्रतिशत किताबें फर्जी निकलीं। वहीं छटवीं की 75 प्रतिशत, सातवीं और आठवीं की 80 प्रतिशत, 11 वीं कॉमर्स की 66.67 प्रतिशत, 11 आर्ट्स की 80 और 12 कॉमर्स की 66.67 प्रतिशत किताबें फर्जी निकलीं।