बिहार समाचार – भारत की प्रमुख विरासत नालंदा विश्वविद्यालय का PM ने किया उद्घाटन, कई देशों से आये मेहमान – विडियो
पलपल इंडिया प्रतिनिधि,बिहार । भारत में कितनी ही विरासत है और कितनी ही ईर्ष्या करने वालो मुगलों और अंग्रेजो ने मिटाने की हजार कोशिश की और कुछ में कामयाब भी हुए लेकिन उनका इतिहास मिटा नहीं पाए जिसके फलसवरूप सरकार इन विरासतों का संरक्षण कर रही है और इनका पुनः निर्माण भी करवा रही है ऐसी ही एक विरासत है जो नालंदा विश्वविद्यालय नाम से पूरे विश्व में विख्यात है। हम आपको बता दे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के नवीन परिसर का बुधवार को उद्घाटन किया। नए कैंपस के उद्घाटन के साथ ही इस प्राचीन विश्वविद्यालय के इतिहास की चर्चा हर तरफ हो रही है। दुनिया के पहले आवासीय नालंदा विश्वविद्यालय का काफी चर्चित तथा प्राचीन इतिहास है। इसका जिक्र हमें कई किताबों में मिलता है। इस विश्वविद्यालय में कई महान लोगों ने पढ़ाई की थी।
आग से किताबे जलाई जा सकती है लकिन ज्ञान नहीं । नालंदा केवल नाम नहीं एक पहचान और सम्मान है – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास
सबसे पहले हम आपको नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास बताते है प्राचीन भारत का नालंदा विश्वविद्यालय एक प्रमुख और ऐतिहासिक शिक्षण केंद्र था। यह दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था, जहां पर एक ही परिसर में शिक्षक और छात्र रहते थे। इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त सम्राट कुमार गुप्त प्रथम ने 450 ई. में स्थापना की थी। हर्षवर्धन और पाल शासकों ने भी बाद में इसे संरक्षण दिया। इस विश्वविद्यालय की भव्यता का अंदाजा इसी से लगा सकते है कि इसमें 300 कमरे, 7 बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए 9 मंजिला एक विशाल पुस्तकालय था। पुस्तकालय में 90 लाख से ज्यादा किताबें थीं। अगर हम इतिहास में इसके महत्त्व की बात करें तो इसका इतिहास, शिक्षा के प्रति भारतीय दृष्टिकोण और इसकी समृद्धि को दिखाता है। की दुनिया गुफाओं से निकल कर जीना सीख रही थी तब भारत इतनी प्रगति कर चूका था
यही कारण था की ईर्ष्यावश तुर्की शासक और लुटेरे बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय में आग लगवा दी थी और उसने अनेक धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षु मार डाले थे कहा जाता है की नालंदा पुस्तकालय में इतनी किताबें थी कि लुटेरे खिलजी की लगाईं यह आग तीन महीने तक जलती रही. और हजारों साल से गुरुओं और धर्माचार्यों द्वारा समेटा हुआ ज्ञान जल कर ख़ाक हो गया था.
फिर 800 साल के लंबे इंतजार के बाद इसे फिर इसे पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायदें हुईं और सरकारों ने इस पर काम किया। हम आपको बता दे की सबसे पहले 2007 से तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पहल के बाद इसके निर्माण की रूपरेखा बनाई गई थी नई यूनिवर्सिटी 2014 को अस्थाई रूप से 14 विद्यार्थियों के साथ संचालित होना शुरू हुई। साल 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राजगीर के पिलखी विलेज में नालंदा विवि के स्थाई परिसर की आधारशिला रखी थी। नए परिसर का निर्माण कार्य साल 2017 से प्रारंभ किया गया और 19 जून 2024 को इसका उद्घाटन हुआ। जो की तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया
455 एकड़ में फैले कैंपस की खासियत