पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। जबलपुर जिले की शहपुरा तहसील में किसानों का बुरा हाल है दिनभर लाइन में लगने के बाद यूरिया नहीं मिल पा रहा है। लेकिन प्राइवेट दुकानदार यूरिया खरीद कर धन्ना सेठ बन रहे हैं। और अच्छी खासी चांदी काट रहे हैं, लेकिन देखने और सुनने वाला यहां कोई नहीं। हाल में ही एक ऐसा मामला शहपुरा की सबसे बड़ी एक दुकान में देखने को आया जब किसान दुकानदार के यहां दवाई लेने गया तो बाकायदा दुकानदार ने 19 हजार की दवा दी। किसान का कहना था कि हमारे 12 एकड़ खेत में मक्का लगा हुआ है जो 20 से 25 दिन का है जिसमें कचरा हो रहा है। इसलिए मुझे नींदा नाशक दवाई दी जाए।
किसान ने खेत जाकर वकायदा दुकानदार के कहे अनुसार वैसा ही छिड़काव किया जो दुकानदार ने बताया था। लेकिन चार-पांच दिन बाद जब वह दोबारा किसान खेत गया तो फसल एक-एक करके सूखने लगी किसान घबरा गया। किसान ने इसकी शिकायत पहले तो दुकानदार को बताया लेकिन दुकानदार सुनने को तैयार नहीं। जिसकी शिकायत कृषि विभाग में की गई दो-तीन दिन बाद कृषि विभाग वाले अधिकारी खेत में पहुंचते हैं और किसान के ऊंपर दबाव बनाते हैं कि आप आपस में सेटलमेंट कर लें उल्टा किसन को सलाह दे रहे थे। जब किसान ने बताया कि हमारे पास जीएसटी का बिल है, तो बोले इससे कुछ नहीं होता।
अब किसान परेशान है कि, अगर जाए तो कहां जाएं जब कृषि विभाग वाले ही समस्या का निदान नहीं कर पा रहे हैं तो फिर कौन करेगा। अब देखना यह होगा कि शहपुरा से लेकर पाटन तक लंबे समय से बैठे अधिकारी इस समस्या का निदान निकल पाते हैं या यूं ही भर्रा शाही का आलम चलता रहेगा। पाटन और शहपुरा क्षेत्र में जगह-जगह कीटनाशक दवाइयों की दुकान खुली है। इनका लाइसेंस कहां बनता है मनमाने तरीके से दवाइयां बेच रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर मात्र दिखावा होता है।
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