पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। यह तस्वीरें किसी शव यात्रा की नहीं बल्कि एक बीमार वृद्धा को अस्पताल ले जाने की है। मामला जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कुड़ार के मजरा कोतवालीपुर और कर्रीपुरा का है। इन दोनों बस्तियों को आजादी के 78 सालों बाद भी कोई रास्ता नहीं मिल सका, एक तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन का घना जंगल और दूसरी तरफ निजी भूमि लगी हुई है जिससे यहां के लोगों को खेतों की मेड़ से आवागमन करने को मजबूर होना पड़ता है।
मीरा बाई बंशकार ने बताया कि गांव के लिए कोई रास्ता नहीं है इस लिए खेतों की मेड़ से आवागमन करना पड़ता है। बरसात के दिनों में खेतों में फसलों की सुरक्षा हेतु बाड़ लग जाने एवं कीचड़ की वजह से आवागमन में कठिनाइयां कई गुना बढ़ जाती हैं। बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ता है क्योंकि यहां एम्बुलेंस, जननी एक्सप्रेस या डायल हंड्रेड जैसे इमरजेंसी वाहन पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। बरसात में बीमार होने पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से यहां के कई लोगों की मौत हो चुकी है।
राम सेवक बंशकार ने बताया कि यहां 5वीं तक स्कूल है आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को इन्हीं खतरे के मार्गों से आवागमन करना पड़ता है। बरसात के 4 माह बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी मुश्किलों में पहुंच पाते हैं। पट्टे की जमीन होने से सड़क नहीं बन पा रही है। इसी वजह से इन दो बस्तियों के लोगों को इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों की मांग है कि प्रशासन हस्तक्षेप कर रास्ता के लिए जमीन की व्यवस्था कर सड़क का निर्माण कारवाये ताकि यहां के लोगों की समस्या हल हो सके।
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