पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। बिजली कंपनी पक्षियों की जान बचाने का प्रयास कर रही है। कई बार परिंदे ट्रांसमिशन लाइन और ऊंचे टावरों पर टकराकर चोटिल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। इन दुरघटनाओं से पक्षियों को बचाने के लिए मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने पक्षी उड़ान डायर्वटर का उपयोग किया है। इसे बर्ड गार्ड भी कहते है।मध्य प्रदेश में सबसे पहले जबलपुर समेत कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को लिया गया है , जहां पर स्थानीय या प्रवाशी पक्षियों के आने के कारण अक्सर ट्रांसमिशन लाइनों में ट्रिपिंग और पक्षी दुर्घटना का शिकार हो जाते है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा था कि हमने सबसे पहले “प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से पक्षियों यानी राजहंस आदि की आकस्मिक टक्कर से बचने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों में बर्ड डायवर्टर लगाए। इसके पश्चात मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने इस पर खुद कार्रवाई की। करीब एक साल इस उपकरणों को कुछ लाइन पर लगाकर विश्लेषण किया। जिसके बाद पता चला की बहुत मात्रा में पक्षियों की जान बची और ट्रांसमिशन लाइन में ट्रिपिंग भी नियंत्रित हुई। आपको बता दे सबसे ज्यादा नदियों के किनारे भारी मात्रा में प्रवासी पक्षी आते रहते हैं। जिससे कारण इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं। इसलिए जबलपुर में नर्मदा किनारे अक्सर पक्षी मारे हुए पाए जाते है और यह क्षेत्र ट्रिपिंग के लिए भी बहुत संवेदनशील है।
पहले चरण में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने टावरों में बर्ड गार्ड या बर्ड प्रीवेंटर लगाने का काम शुरू किया और रात के समय पक्षी लाइनों के संपर्क में न आए इसलिए बर्ड फ्लेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बर्ड फ्लेपर रात को चमकते हैं क्योंकि इसमें रेडियम की परत भी रहती है। फ्लेपरों के चमकने के कारण रात को पक्षी लाइनों से पर्याप्त दूरी बनाने में सफल रहते हैं।
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