मौलवी सैयद अहमद अली ने कहा कि गरबा जैसे आयोजनों में भाग लेना इस्लामी तालीम के खिलाफ है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग ऐसे त्योहारों से दूर रहें। शहर काजी अहमद अली ने मुस्लिम समुदाय को लिखे संदेश में कहा, ‘मैं मुस्लिम युवाओं, माताओं, बहनों और बेटियों से अनुरोध करता हूं कि वे मेलों में न जाएं। गरबा कार्यक्रम न देखें। इसके बजाय मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घर पर रहें।’ मौलवी ने कहा कि उनकी अपील मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई है।
मौलवी ने यह फरमान तब जारी किया जब हाल ही में मध्य प्रदेश में नवरात्रि शुरू होने से पहले पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। रतलाम में भी कई गरबा कार्यक्रमों के आयोजकों ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगा दिया है। वहीँ इंदौर में एक स्थानीय भाजपा नेता जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा ने सुझाव दिया कि गरबा में भाग लेने वालों को कार्यक्रम में प्रवेश करने से पहले गोमूत्र पीना अनिवार्य होगा। जिसके बाद से मौलवी ने ये फरमान निकाला।