वॉशिंगटन। दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने तेजी से बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं, जिनका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है। अवैध प्रवास को रोकने के सख्त उपायों के बीच ट्रंप ने अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता (Birthright Citizenship) को समाप्त करने का आदेश जारी किया है। अब तक अमेरिकी कानून के तहत वहां जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को अमेरिकी नागरिकता मिलती थी। लेकिन ट्रंप के नए आदेश के तहत, अब अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को तभी नागरिकता मिलेगी जब उनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक होगा। इस निर्णय का असर भारतीय मूल के लाखों लोगों सहित दुनिया भर के प्रवासी समुदायों पर पड़ेगा।
क्या है जन्म आधारित नागरिकता?
जन्म आधारित नागरिकता एक कानूनी सिद्धांत है, जिसके अनुसार किसी भी देश में जन्म लेने वाले बच्चे को उस देश की नागरिकता स्वतः प्राप्त होती है, भले ही उसके माता-पिता का नागरिकता या प्रवास का दर्जा कुछ भी हो।
ट्रंप के आदेश की मुख्य बातें:
अमेरिका में जन्मे बच्चों को तभी नागरिकता दी जाएगी, जब उनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक हो।
यह आदेश 30 दिनों में लागू होगा।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि 14वें संशोधन की गलत व्याख्या की गई थी। “जो लोग अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, उन्हें जन्म आधारित नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए।”
भारतीय समुदाय पर प्रभाव
अमेरिका में लगभग 54 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें दो-तिहाई प्रवासी हैं।
अस्थायी वीजा (जैसे H1B) या टूरिस्ट वीजा पर रह रहे भारतीय परिवारों के बच्चों को अब स्वतः नागरिकता नहीं मिलेगी।
“बर्थ टूरिज्म” के तहत अमेरिका जाकर बच्चों को जन्म देने वाले परिवारों पर भी यह आदेश सीधा प्रभाव डालेगा। “बर्थ टूरिज्म” वह प्रक्रिया है जिसमें महिलाएं केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका में जाकर बच्चे को जन्म देती हैं। इस आदेश में इस प्रवृत्ति को रोकने का भी प्रावधान है।
इस फैसले का तुरंत विरोध शुरू हो गया है। प्रवासी अधिकार संगठनों ने इसे अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि 14वें संशोधन की व्याख्या को बदलना आसान नहीं होगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है, जिससे इस आदेश का प्रभावी होना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।