पलपल इंडिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में पेपर लीक कांड में आइडलिक कॉलेज के कम्प्यूटर आपरेटर दीपक सोलंकी सहित धीरेंद्र नरवरिया और गौरव सिंह गौर दोनों विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर लिया है। पेपर चुराने का वीडियो भी कॉलेज की तरफ से पुलिस को दिया है। भाजपा नेता का कॉलेज होने के नाते भी पुलिस व विश्वविद्यालय सीधी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। एमबीए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में पेपर लीक होने का खुलासा हो चुका है। कांग्रेस से भाजपा में आए अक्षय बम के आइडलिक कॉलेज से पेपर आउट होने के तार जुड़े हैं। यहां तक कि कालेज की प्राचार्य डॉ. बबीता काडकिया ने विश्वविद्यालय की जांच समिति के समक्ष प्रश्न पत्र अपने कार्यालय में रखने की बात स्वीकार कर ली है।
अब कुलगुरु डा. रेणु जैन ने जल्द ही समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। ताकि 12 जून को होने वाली कार्यपरिषद में रिपोर्ट को रखा जा सके। वहां सदस्य रिपोर्ट पर बहस करेंगे। उसके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन कॉलेज को कार्रवाई के दायरे में लेंगे। लोकपाल व रिटायर्ड जस्टिस नरेंद्र सत्संगी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति में अतिरिक्त संचालक डॉ. सुधा सिलावट, डीसीडीसी डा. राजीव दीक्षित, डीएसडब्ल्यू डा. एलके त्रिपाठी है। तीन दिन पहले समिति ने सभी परीक्षा केंद्रों को पेपर थाने में रखने से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। आइडलिक कॉलेज की प्राचार्या डॉ. बबीता ने लिखित स्पष्टीकरण देते हुए पेपर को कार्यालय में रखने की बात कहीं है।
यहां तक कि अधिकांश कॉलेजों की तरफ से परीक्षा के दौरान सील बंद लिफाफे को सीसीटीवी के सामने खोलने के फुटेज भी नहीं दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक सदस्य परीक्षा की गोपनीयता भंग करने पर कॉलेज पर कार्रवाई की अनुशंसा कर सकती है। नियमानुसार पेपर को थाने में रखना होते है। सोमवार को लिफाफे में रिपोर्ट मिलेगी, जो सीधे कार्यपरिषद में खोली जाएगी। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. एके द्विवेदी ने पेपर लीक होते ही आपात बैठक बुलाने पर जोर दिया था। मगर विश्वविद्यालय ने 12 जून की तारीख तय की। सदस्य डॉ. द्विवेदी का कहना है कि पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय की लापरवाही भी रही है।
एफआइआर में तीन दिन लगे हैं। वे कहते है कि बार-बार पेपर लीक होने से विश्वविद्यालय की छवि खराब होती है। बैठक में रिपोर्ट पर विस्तुत चर्चा की जाएगी और कालेज पर कार्रवाई करेंगे। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. एके द्विवेदी ने पेपर लीक होते ही आपात बैठक बुलाने पर जोर दिया था। मगर विश्वविद्यालय ने 12 जून की तारीख तय की। सदस्य डॉ. द्विवेदी का कहना है कि पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय की लापरवाही भी रही है।एफआइआर में तीन दिन लगे हैं। वे कहते है कि बार-बार पेपर लीक होने से विश्वविद्यालय की छवि खराब होती है। बैठक में रिपोर्ट पर विस्तुत चर्चा की जाएगी और कालेज पर कार्रवाई करेंगे।