पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। देश के महान उद्योगपति रतन टाटा के निधन से पूरी दुनिया शोक में है। उनके आखिरी सफर की तैयारी हो रही है। अभी एनसीपीए ग्राउंड पर रतन टाटा को नम आखों से विदाई दी जा रही है। उनके अंतिम दर्शन को भीड़ उमड़ रही है और हर सेक्टर के दिग्गज उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित कर रहे हैं। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे से लिपटा है और दर्शन के लिए रखा गया है। शाम 4 बजे तक उनका अंतिम दर्शन किया जा सकता है। क्यूंकि खबर आ रही है की उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे कर दिया जायेगा. रतन टाटा ने देश को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम किया और देश की तरक्की में काफी अपने कार्यो द्वारा सहायता की है। वह अपने मूल्यों और उसूलों के लिए जाने जाते हैं।
रतन टाटा का बचपन उनकी दादी के समीप बीता
रतन टाटा का जन्म मुंबई में 28 दिसंबर 1937 को पारसी परिवार में हुआ था। उस समय देश में अंग्रेजों का राज था। रतन टाटा के पिता नवल टाटा थे और उनकी माँ मां सूनी टाटा थी।अगर उनके बचपन की बात करें तो उनका बचपन इतना अच्छा नहीं था। देश के सबसे अमीर घरों में से एक टाटा परिवार में जन्म लेने के बाद भी रतन टाटा को छोटी उम्र से ही माता-पिता से दूर रहना पड़ा। दरअसल रतन टाटा के जन्म के बाद उनके माता-पिता के बीच अनबन हो गई और दोनों ने अलग होने का फैसला किया। जब 1948 में रतन के माता-पिता अलग हुए तब उनकी उम्र 10 साल थी। उनकी दादी ने उनका पालन-पोषण किया।
शुरुआती शिक्षा मुंबई में करने के बाद रतन टाटा हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और वहां से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद 2 साल तक लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय के लिए नौकरी की थी। लेकिन साल 1962 में दादी नवाजबाई टाटा की तबीयत खराब हो गई जिसके बाद वह नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए।
प्यार हुआ पर शादी नहीं हो सकी
इस बीच उन्हें प्यार भी हुआ लेकिन दादी की तबियत खराब होने के चलते उन्हें भारत आना परा और उनकी प्रेमिका उनके साथ भारत नहीं आई और कुछ समय बाद उनकी प्रेमिका ने अमेरिका में ही किसी और से शादी कर ली। जिसके बाद रातन टाटा ने अपना पूरा ध्यान अपने बिजनेस में लगा दिया। वे मालिक की पोजीशन पर थे लेकिन उन्होंने कर्मचारी के तौर पर अपनी ही कंपनी में काम किया। टाटा स्टील में काम करने के बाद साल 1991 में उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान थामी और देखते ही देखते उनकी कंपनी आसमान छूने लगी और बुलंदियों को पा लिया। टाटा टी, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील जैसी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया। ये कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं।
जिस कंपनी में अपमान किया उसे झुकने पर मजबूर किया
90 के दशक का समय था उस समय फोर्ड (Ford) का बड़ा नाम था, लेकिन टाटा ग्रुप की कंपनी को इतना कोई नही जनता था। रतन टाटा ने इसकी पैसेंजर कार डिविजन को बेचने का मन बनाते हुए फोर्ड के साथ डील की थी। लेकिन अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने उनका मजाक उड़ाकर अपमान किया था। इसके बाद देखते ही देखते महज 9 साल में बाजी पलटी और फोर्ड और फोर्ड के दो लोकप्रिय ब्रांड जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर बिल फोर्ड को झुकने पर मजबूर कर दिया।
कई पदकों से सम्मानित हुए रतन टाटा
साल 2000 में रतन टाटा को पद्म भूषण दिया गया, तो साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। रतन टाटा का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था, उनके कई बड़े बड़े शौक भी थे। इनमें पिआनो बजाना, लग्गजरी कारें खरीदना और विमान उड़ाना। वह 2007 में F-16 फाल्कन उड़ाने वाले पहले भारतीय भी बने थे। भारतीय उद्योगपति रतन टाटा को देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सम्मानित किया गया था. जहां एक ओर उन्हें ऑस्ट्रेलिया के सर्वोच्च नागरिक.सम्मान ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया से सम्मानित किया गया था, तो वहीं फ्रांस से भी उन्हें सर्वोच्च सम्मान मिला था.
रतन टाटा का जीवन लोगों के प्रेरणादायक रहा है और ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. उन्होंने अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर काम किया, तो दूसरी ओर अपने कारोबार से होने वाली आमदनी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दान करके देश के सबसे बड़े दानवीरों में शुमार रहे. यही नहीं उन्होंने अपनी काबिलियत की दम पर जिस बिजनेस जिस बिजनेस को छुआ उसे सोना बना दिया और कई लोगों की किस्मत भी बदली.