पलपल इंडिया प्रतिनिधि,सतना। सतना जिला मुख्यालय से महज 30 किमी दूर इस विद्यालय को 11 वर्ष पहले खोल दिया गया था। लेकिन कभी किसी के मकान में तो कभी किसी के मकान में या फिर शिक्षकों के द्वारा स्वयं किराए पर भवन लेकर स्कूल तो चलाया जा रहा है। लेकिन बच्चों के लिए जरूरी आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर दिया गया है। दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी ना तो यहां पर पेयजल की व्यवस्था है और नाही मिड डे मील बनाने के लिए रसोई घर का निर्माण कराया गया।
बारिश के समय में बच्चों को एक प्राइवेट कमरे में शिक्षा ग्रहण करना पड़ रही है, जबकि खुले मौसम में आम के पेड़ के नीचे बच्चों को शिक्षा ग्रहण करना पड़ती है। प्राथमिक शाला मुगहनी कला की हेडमास्टर ने बताया कि कई वर्षों से विद्यालय भवन की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं किया जा सका। ज्यादातर यहां पर पढ़ने वाले बच्चे आदिवासी अंचल से हैं। जिन्हें विद्यालय भवन न होने के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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