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“20 साल से भी पहले की बात है, जब ट्रेंडसेटर निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा का ‘फैक्ट्री’ नामक दफ्तर वर्सोवा टेलीफोन एक्सचेंज के पास अंधेरी पश्चिम में स्थित था। सुबह से लेकर शाम और देर रात तक, यहां दुनिया भर से आने वाले युवाओं का एक मेला लगता था। उस मेले से निकले एक लड़के, रोहित जुगराज, ने मुझसे मिलवाया, जो रामू की शागिर्दी में काम कर रहा था। पहली फिल्म भी ‘फैक्ट्री’ के लिए बनाई गई थी, लेकिन न ‘जेम्स’ चली और न ‘सुपरस्टार’। रोहित ने पंजाबी सिनेमा में कदम बढ़ाया, जहां उन्होंने गिप्पी ग्रेवाल और दिलजीत दोसांझ के साथ ‘जट्टा जेम्स बॉन्ड’ और ‘सरदारजी’ जैसी हिट फिल्में बनाईं। हिंदी सिनेमा में उनकी पिछली कोशिश ‘अर्जुन पटियाला’ फिर सिरे नहीं चढ़ सकी। अब रोहित अपनी पहली वेब सीरीज ‘चमक’ के साथ हाजिर हैं। सीरीज बताती है कि चमक दो तरह की होती है, एक तो वह जो दुनिया भर में दिखती रहती है, यानी ग्लैमर और दूसरी वह, जो इंसान के भीतर होती है, यानी आत्मावलोकन, आत्मज्ञान। इन दोनों चमक के बीच रहे इंसान की कहानी है वेब सीरीज ‘चमक।'”