“चित्रकूट, सतना: मुगल शासन की निशानी, गधों का ऐतिहासिक मेला”

By: PalPal India News
November 15, 2023

palpalindianews/satna

सतनाः भारत में मुगलों का शासन खत्म हुए करीब 500 साल हो गए, लेकिन उनकी कई परंपराएं आज भी बदस्तूर जारी हैं। मध्य प्रदेश में सतना जिले के चित्रकूट में लगने वाला गधों का मेला मुगल शासन की ही निशानी है। चित्रकूट में रामघाट के पास हर साल यह मेला लगता है। यह तीन दिनों तक चलता है। इस मेले की शुरुआत मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में हुई थी।
राम की नगरी के रूप में मशहूर चित्रकूट में हर साल लगने वाले इस मेले में दूर-दूर से गधों के अलावा घोड़े और खच्चर आते हैं लेकिन इसकी पहचान गधा मेला या बाजार के रूप में ही है। खास यह भी है कि गधों के नाम फिल्म अभिनेताओं के नाम पर होते हैं। मतलब यह कि इस मेले में शाहरुख, सलमान और आमिर के नाम की बोली लगती है जो लाखों में होती है। पिछले साल कोविड-19 के कारण यह मेला स्थगित रहा, लेकिन इस बार मेले में जहां रौनक है तो वहीं एक से बढ़कर एक गधे भी देखने को मिल रहे हैं। मेले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के आस-पास जनपदों से व्यापारी और पशु पालक अपने गधे, घोड़े और खच्चर को लेकर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 16वीं शताब्दी में मुगल आक्रांता बादशाह औरंगजेब अपने काफिले के साथ चित्रकूट पर चढ़ाई करने आया था। यहां उसके काफिले में बहुत से घोड़े और गधे बीमारी से ग्रसित होकर मारे गए। काफिले में गधों की कमी होने पर उनकी पूर्ति के लिए स्थानीय स्तर पर पशु बाजार लगवाया गया था। तब से लेकर आज तक दीपावली के अगले दिन मंदाकिनी तट किनारे यह ऐतिहासिक गधा मेला लगता चला रहा है। मेले का संचालन चित्रकूट नगर परिषद, जिला सतना करता है। इस वर्ष भी मेले में हजारों गधे, घोड़े और खच्चर खरीद-बिक्री के लिए लाए गए हैं। इन जानवरों के नाम फिल्म अभिनेताओं के नाम पर होते हैं। उनकी कीमत लाखों में लगती है। मेले में काफी भीड़ होती है, क्योंकि पशु खरीदारों के अलावा दीपावली मेले में आए हुए लोग भी इसे देखने के लिए आते हैं।: गधों के नाम फिल्म अभिनेताओं के नाम पर होते हैं। मतलब यह कि इस मेले में शाहरुख, सलमान और आमिर के नाम की लगती है बोली
 सतना जिले के चित्रकूट में लगने वाला गधों का मेला मुगल शासन की ही निशानी है। चित्रकूट में रामघाट के पास हर साल यह मेला लगता

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