पलपल इंडिया प्रतिनिधि , जबलपुर. शहर की तंग गलियों में बने व्यावसायिक क्षेत्रों में हो रहीं अग्नि दुर्घटनाएं शहरवासियों को दहला रही हैं। आग लगने से जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है। इन इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए दमकल वाहनों से लेकर एम्बुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल है। विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार हो रही अग्नि दुर्घटनाएं बड़े खतरे की घंटी हैं। परंपरागत बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों का सेक्टरवार विस्तार कर बफर जोन निर्धारित किए जाने चाहिए।
ये है मौजूदा तस्वीर
कई रिहायशी इलाकों में कारखाने संचालित हो रहे हैं।शहर में भवनों में ज्वलनशील सामग्री के बड़े गोदाम संचालित हो रहे हैं। कई इलाकों में कारखाने हैं। इनमें फाइबर, फोम, कपड़े, रुई से लेकर खाद्य तेल, इंजिन आयल समेत अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी है। गलगला, गुरंदी, निवाड़गंज, बल्देवबाग, ओमती, नया मोहल्ला जैसे संकरी गलियों वाले इलाकों में आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों का मौके पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे बदलेगी व्यवस्था
जेडीए की योजना 64 व 65 के बीच नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने जमीन का प्रावधान किया गया है। इस क्षेत्र में टिम्बर कारोबारियों को जमीन दी जा सकती है। इससे मदनमहल, महानद्दा, आमनपुर, गुलौआ इलाकों के लोगों को कारखानों से निजात मिलेगी। कृषि उपज मंडी की 52 एकड़ जमीन खाली होना है। इस जमीन को दो सेक्टर में बांटकर यहां गल्ला और फुटकर सब्जी की मंडी को बनाया जा सकता है। निवाड़गंज में बड़ा फुहारा के कपड़ा व्यापार को और विस्तार दिया जा सकता है। नगर के बाजारों, लघु औद्योगिक गतिविधियों को व्यविस्थत करने सेक्टरवार नए बाजार और लघु उद्योग के केन्द्र विकसित किए जाने चाहिए। जिनमें चौड़ी सड़कों से लेकर अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम हों।
प्रभात पाराशर, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
संकरी गलियों में जमीन के मिश्रित उपयोग से अग्नि दुर्घटना की स्थिति में जान-माल के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। सेक्टरवार मार्केट की आवश्यकता है।
संजय वर्मा, टाउन प्लानर