पलपल इंडिया प्रतिनिधि,मध्यप्रदेश। सरकार नर्मदा के कायाकल्प के लिए कई ठोस प्रयास कर रही है, ऐसे में मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा के कायाकल्प के लिए बैठक की। जिसमें उन्होंने बैठक के दौरान तमाम को अधिकारियों तमाम। जिसमें उन्होंने नर्मदा के किनारे बसे शहरों में मास-मदिरा की ब्रिकी पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।
मध्यप्रदेश में नर्मदा को जीवनदायनी भी कहा जाता है ऐसे में सरकार बहुत से प्रयासों द्वारा नर्मदा के समग्र विकास के लिए कई कानून बना रही है। शुक्रवार को मंत्रिमंडल समिति की बैठक हुई। इस समिति बैठक में सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अमरकंटक विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाए। ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग हो। पर्यावरण संरक्षण के लिए नर्मदा के आस-पास चलने वाली गतिविधियों पर सेटेलाइट इमेजरी व ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी नजर रखी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए की नर्मदा नदी के तट पर बसे धार्मिक नगरों और धार्मिक स्थलों व उनके आसपास मांस-मदिरा का उपयोग नहीं हो। उन्होंने नदी में मशीनों से खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सहित उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, परिवहन स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव वीरा राणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पुण्यसलिता मां नर्मदा प्रदेशवासियों के लिए श्रद्धा, विश्वास और आस्था का केन्द्र हैं। यह केवल नदी नहीं, हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। उपभोक्ता आधारित जीवन शैली ने प्रकृति और पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया है, उसके दुष्प्रभावों से नदियों और अन्य जल स्त्रोतों को बचाना आवश्यक है। नर्मदा संरक्षण के लिए सभी से सुझाव और नवाचारी उपाय आमंत्रित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर के उन्नयन के लिए कार्ययोजना बनाने और इस संबंध में केन्द्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से चर्चा के निर्देश भी दिए। राज्य सरकार ने मां नर्मदा के समग्र विकास का संकल्प लिया है और इस दिशा में निरंतर गतिविधियां जारी हैं। विभिन्न शासकीय विभागों के साथ स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक मंचों और जनसामान्य की सक्रिय सहभागिता से नर्मदा संरक्षण, संवर्धन की योजना का आधुनिकतम तकनीक और संसाधनों का उपयोग करते हुए क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां नर्मदा के समग्र विकास के लिए यह प्रारंभिक बैठक है। इस दिशा में क्रियान्वित की जा रही गतिविधियों की नवम्बर के दूसरे सप्ताह में पुन: समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नर्मदा नदी के दोनों ओर विद्यमान जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में साल और सागौन के पौधरोपण और जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। समृद्ध बॉयोडायवर्सिटी के संरक्षण व प्रोत्साहन गतिविधियों में वनस्पति शास्त्र और प्राणी शास्त्र के विशेषज्ञों को जोड़ते हुए गतिविधियां संचालित की जाएं। इसके साथ ही नदी के दोनों ओर पांच किलोमीटर तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाए। इससे कीटनाशक व अन्य रसायनों के नर्मदा जी में जाने से रोकने में मदद मिलेगी।