वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महिला खेलों में ट्रांसजेंडर एथलीटों के भाग लेने पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस आदेश में ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ‘लिंग’ का मतलब जन्म के समय निर्धारित लिंग से है, और इसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की महिला खेलों में भागीदारी पर कड़ा रुख अपनाया गया है। ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में महिला और पुरुष के रूप में लिंग की परिभाषा निर्धारित की थी।
व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा- “इस कार्यकारी आदेश के साथ, महिला खेलों में चल रहे विवाद का अंत हो गया है।”
इस आदेश के तहत, शैक्षिक विभाग को यह अधिकार दिया गया है कि वह उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करें, जो ट्रांसजेंडर एथलीटों को महिला खेलों में भाग लेने की अनुमति देते हैं। यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे संघीय वित्तीय सहायता से वंचित किया जा सकता है। यह कदम ‘टाइटल IX’ के उल्लंघन को रोकने के लिए उठाया गया है, जो शैक्षिक संस्थानों में लिंग-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
ट्रंप ने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक को लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) को चेतावनी दी कि अमेरिका ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को अस्वीकार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री, मार्को रुबियो को यह संदेश देने का अधिकार दिया गया है कि, “अमेरिका ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को पूरी तरह अस्वीकार करता है।”
आलोचनाओं का सामना कर रहा यह आदेश- इस आदेश की ट्रांसजेंडर अधिकारों के समर्थन में काम करने वाले समूहों ने आलोचना की है।
एनाल वुमन लॉ सेंटर और GLAAD जैसी संस्थाओं ने इसे महिला अधिकारों और समानता के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि ट्रांसजेंडर छात्राओं का खेलों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, और उन्हें समान अवसर मिलना चाहिए। यह कदम महिला खेलों की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन यह ट्रांसजेंडर अधिकारों के समर्थकों द्वारा कड़ी आलोचना का शिकार हो सकता है।