पलपल इंडिया प्रतिनिधि। बॉलीवुड अदाकारा रहीं ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया है. साथ ही लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से भी आचार्य महामंडलेश्वर का पद छीन लिया गया है.किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया गया। ममता कुलकर्णी की एंट्री से किन्नर अखाड़े में महाभारत मचा हुआ था। इस मामले में आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर ही सीधा सवाल खड़ा हो गया। उनकी पद पर ही सवाल शुरू हो गया था।
दरअसल, ममता कुलकर्णी ने संन्यास की दीक्षा ली थी। संन्यास लेने के बाद ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाया गया था। इसका जमकर विरोध हुआ था। अब ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया है। दोनों को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ये कार्रवाई की है।
बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर की पदवी देने के बाद किन्नर अखाड़े में जबरदस्त उथल-पुथल मची है। किन्नर अखाड़ा के अंदर ही इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है, जिससे दो बड़े गुट आमने-सामने आ गए हैं। इस घटना की जानकारी देते हुए किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने कहा कि उन्हें किन्नड़ अखाड़े के महामंडलेश्वर के पद से हटा दिया गया है। किन्नर अखाड़ा को लेकर आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने असंवैधानिक ही नहीं बल्कि सनातन धर्म और देश हित को छोड़कर ममता कुलकर्णी जैसे देशद्रोह के मामले में लिप्त महिला, जो फिल्मी ग्लैमर से जुड़ी है, उसे बिना किी धार्मिक और अखाड़े की परंपरा को मानते हुए वैराग्य की दिशा के बजाय सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि और पट्टाभिषेक करना गलत है। इस कारण मुझे आज बेमन से मजबूर होकर देशहित, सनातन और समाज हित में उन्हें पदमुक्त करना पड़ा।
किन्नर अखाड़े के नाम का असंवैधानिक अनुबंध जो जूना अखाड़े के साथ कर किन्नर अखाड़े के सभी प्रतीक चिह्नों को भ्ज्ञी क्षत-विक्षत किया गया है। यह न तो जूना अखाड़े के सिद्धांतों के अनुसार चल रहे हैं, न किन्नर अखाउ़े के सिद्धांतों के। उदाहरण के लिए किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही वैजंती माला गले में धारण कराई गई थी। वह श्रृंगार की प्रतीकात्मक है। उन्होंने उसे त्याग कर रुद्राक्ष की माला ध्णारण कर ली। यह संन्यास का प्रतीक है। संन्यास बिना मुंडन संस्कार के मान्य नहीं होता है। इस प्रकार यह सनातन धर्म प्रेमी और समाज के साथ एक प्रकार का छलावा कर रहे हैं। इसलिए, इन जानकारी को जनहित और धर्महित में दिया जा रहा है।
किन्नर अखाड़ा के प्रयागराज कुंभ 2019 के मामले का भी ऋषि अजय ने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिना मेरी सहमति के जूना अखाड़ा के साथ एक लिखित अनुबंध 2019 के प्रयागराज कुंभ में किया। यह अनैतिक ही नहीं, बल्कि एक प्रकार की 420 है। बिना संस्थापक के सहमति और हस्ताक्षर के जूना अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा के बीच का अनुबंध कानून के अनुकूल नहीं है। अनुबंध में जूना अखाड़े ने किन्नर अखाड़ा संबोधित किया है। इसका अर्थ है कि किन्नर अखाड़ा 14 अखाड़ा उन्होंने स्वीकार किया है। इसका अर्थ यह है कि सनातन धर्म में 13 नहीं, केवल 14 अखाड़े मान्य हैं। यह बात अनुबंध से स्वयं सिद्ध है।
किन्नर अखाड़ा को लेकर आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने असंवैधानिक ही नहीं बल्कि सनातन धर्म और देश हित को छोड़कर ममता कुलकर्णी जैसे देशद्रोह के मामले में लिप्त महिला, जो फिल्मी ग्लैमर से जुड़ी है, उसे बिना किी धार्मिक और अखाड़े की परंपरा को मानते हुए वैराग्य की दिशा के बजाय सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि और पट्टाभिषेक कर दिया। इस कारण मुझे आज बेमन से मजबूर होकर देशहित, सनातन और समाज हित में उन्हें पदमुक्त करना पड़ा।
किन्नर अखाड़े के नाम का असंवैधानिक अनुबंध जो जूना अखाड़े के साथ कर किन्नर अखाड़े के सभी प्रतीक चिह्नों को भ्ज्ञी क्षत-विक्षत किया गया है। यह न तो जूना अखाड़े के सिद्धांतों के अनुसार चल रहे हैं, न किन्नर अखाउ़े के सिद्धांतों के। उदाहरण के लिए किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही वैजंती माला गले में धारण कराई गई थी। वह श्रृंगार की प्रतीकात्मक है। उन्होंने उसे त्याग कर रुद्राक्ष की माला ध्णारण कर ली। यह संन्यास का प्रतीक है। संन्यास बिना मुंडन संस्कार के मान्य नहीं होता है। इस प्रकार यह सनातन धर्म प्रेमी और समाज के साथ एक प्रकार का छलावा कर रहे हैं। इसलिए, इन जानकारी को जनहित और धर्महित में दिया जा रहा है।
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास और आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के बीच खुला टकराव देखने को मिल रहा है। अजय दास की ओर से डॉ. त्रिपाठी को हटाए जाने का दावा किया गया है। वहीं, डॉ. त्रिपाठी अजय दास के किसी पद पर नहीं होने की बात कह रही हैं। शुक्रवार दोपहर किन्नर अखाड़े की ओर से बड़ा फैसला लिया गया। ममता कुलकर्णी विवाद के कारण किन्नर अखाड़े के भीतर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद से हटाने की तैयारी चल रही थी। किन्नर अखाड़े के संतों में इस मुद्दे पर गहमागहमी तेज हो गई।
अजय दास ने बड़ा दावा किया था कि वह अब इस अखाड़ा को लेकर बड़ा फैसला लेने वाले हैं। अखाड़ा के संस्थापक अजय दास ने कहा कि वह लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटाने का ऐलान आज दोपहर कर दिया। उन्होंने संकेत दिए कि अखाड़े के भीतर इस फैसले को लेकर जल्द ही कार्रवाई होगी।
किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़े में फैसले पूरी पारदर्शिता के साथ होंगे। आज दोपहर 3 बजे अखाड़े की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें इस विवाद को लेकर बड़ा ऐलान किया जाएगा। उन्होंने अजय दास पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि अजय दास को पहले ही अखाड़े से निकाल दिया गया है।
किन्नर अखाड़े में क्या बंटवारा हो जाएगा? कौन रहेगा, कौन जाएगा? इस विवाद के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आचार्य महामंडलेश्वर के पद पर किसी नए चेहरे की नियुक्ति होगी? किन्नर अखाड़े में गुटबाजी बढ़ती नजर आ रही है। एक तरफ अजय दास खुद को संस्थापक बता रहे हैं, तो दूसरी ओर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
अब हर किसी की नजरें आज दोपहर 3 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि किन्नर अखाड़े में नेतृत्व किसके हाथ में रहेगा? यह विवाद क्या मोड़ लेगा। इस पर जल्द निर्णय होगा।
ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद दिए जाने पर संत समाज की ओर से भी नाराजगी जताई थी। किन्नर अखाड़े की कार्यप्रणाल पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस मामले में संत समाज बंटा हुआ नजर आ रहा है। कई धर्मगुरुओं ने कहा कि ममता कुलकर्णी के मामले में धर्म-परंपरा की अनदेखी की गई।
शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप की ओर से ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ममता कुलकर्णी पर अंडरवर्ल्ड से संबंध का आरोप लगा था। ममता कुलकर्णी ने आरोपों से बरी हुई हैं या नहीं, मैं नहीं जानता हूं। इस प्रकार के मामले के बाद भी उनका महामंडलेश्वर बनाया जाना अनुचित है।
किन्नर कथावाचक जगतगुरु हिमांगी सखी का भी बड़ा बयान भी इस मामले में सामने आया। किन्नर अखाड़ा तो किन्नर समाज के लिए बना था। उन्होंने कहा कि अगर आपको किन्नर के अलावा महिलाओं को महामंडलेश्वर बनाना है तो अखाड़ा का नाम बदलकर दूसरा रख लीजिए। उन्होंने ममता कुलकर्णी मामले में कहा कि बिना शिक्षा दिए ही दीक्षा दे दी।
हिमांगी सखी ने कहा कि ममता कुलकर्णी का मुंडन नहीं कराया गया। चोटी काटकर महामंडलेश्वर बना दिया। यह अनुचित है। वहीं, इस पूरे मामले में डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि ममता कुलकर्णी हमारे साथ 2022 से संपर्क में हैं। पूरी प्रक्रिया के बाद ममता को महामंडलेश्वर बनाने का दावा किया।