पलपल इंडिया प्रतिनिधि , जबलपुर। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह शनिवार को अश्विनी कोष्टा के निवास पर पहुंचे जहां उन्होंने अश्वनी कोष्टा के पिता सुरेश कुमार कोष्टा से मुलाकात की मंत्री राकेश सिंह ने अश्विनी कोष्टा के निधन पर शोक व्यक्त किया और परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को यह भरोसा भी दिलाया की महाराष्ट्र सरकार से बात कर यह कोशिश की जाएगी कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले कहा सरकार से निवेदन है कि इस तरह की घटना की पुनरावृति न हो।ऐसा वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए तथा सरकार अपने इस्तर पर कदम उठा सकती है और प्रयास किया भी जा रहा है राकेश सिंह ने महाराष्ट्र सरकार को तथा देवेंद्र फडणवीस को धन्यवाद भी किया। शोक जताते हुए ये भी कहा एक होनहार बच्ची असमय काल का शिकार हो गई ये बहुत दुर्भाग्य पूर्ण बात है। एक नाबालिग के द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण दो लोगो की मृत्यु के साथ पूरे समाज को खामियाजा भुगतना पड़ा।
पुणे में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली जबलपुर की सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोस्टा की मौत का मामला काफी सुर्खियों में रहा एक रईस जादे ने करोड़ों रूपयों की कार को बेलगाम रूप से चलाकर अश्विनी कोष्टा को मौत के घाट उतार दिया था जिसके बाद आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था आरोपी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई।
पिता और शराब देने वाले बार के खिलाफ होगा मुकदमा
पुणे के पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, आरोपी किशोर के पिता और उसे शराब सर्व करने वाले बार के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होगा. दोनों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (Juvenile Justice Act) की धारा 75 और 77 के तहत कार्रवाई की जाएगी. खून के निशान के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि किशोर को मामला दर्ज होने के बाद रविवार सुबह करीब नौ बजे ससून अस्पताल भेजा गया था. उन्होंने स्वीकार किया, रक्त के नमूने लेने में देरी हुई और रात 11 बजे नमूने लिए गए लेकिन हमारे मामले में खून की रिपोर्ट प्रमुख आधार नहीं है. कुमार ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है और किशोर को अच्छी तरह पता था कि नशे की हालत में गाड़ी चलाने से इस तरह का अपराध हो सकता है और लोगों की जान जा सकती है.एहतियाती उपाय के रूप में, एक अन्य प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए अतिरिक्त रक्त नमूने लिए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नमूने और डीएनए रिपोर्ट दोनों एक ही व्यक्ति के हों. उन्होंने कहा, हमें रक्त जांच की रिपोर्ट नहीं मिली हैं लेकिन प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है. कुमार ने कहा कि प्रारंभिक प्राथमिकी में धारा 304 ए (लापरवाही से मौत) लागू की गई थी, लेकिन उसी दिन इसकी जगह धारा 304 को लागू किया गया.