ब्रिटिश मेडिकल जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 136 मिलियन लोग प्री-डायबिटीज की श्रेणी में आ चुके हैं और यदि सावधानी नहीं बरती गई तो वे जल्द ही डायबिटीज के मरीज बन सकते हैं। वर्तमान में भारत में 13 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। गैर-संक्रामक रोगों में कैंसर और हृदय रोग के बाद डायबिटीज सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारी बन गई है, जो अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है।
क्या है प्री-डायबिटीज?
डायबिटीज के पहले शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है। यदि समय रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए तो टाइप-2 डायबिटीज से बचा जा सकता है। अत्यधिक थकान, अधिक प्यास लगना, अचानक वजन कम होना, बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण बताते हैं कि शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगा है। यदि इस स्थिति में ही ब्लड शुगर को नियंत्रित कर लिया जाए तो डायबिटीज को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्री-डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं?
अगर ब्लड शुगर बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं, तो तुरंत अपनी डाइट में बदलाव करना जरूरी है। संतुलित आहार अपनाकर इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या खाएं?
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल, और दालें।
प्रोटीन से भरपूर भोजन जैसे दालें, सोया, नट्स और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद।
हेल्दी फैट जैसे नट्स, बीज और ऑलिव ऑयल।
क्या न खाएं?
प्रोसेस्ड और जंक फूड।
ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ।
अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और तली-भुनी चीजें।
शराब का सेवन न करें, क्योंकि यह डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है।
डॉक्टर की सलाह: संतुलित आहार और व्यायाम है जरूरी
डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी हैं। रोजाना 30-40 मिनट की एक्सरसाइज, योग और प्राणायाम करने से शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। उन्होंने बताया कि टाइप-2 डायबिटीज से पहले टाइप-1 या प्री-डायबिटीज के लक्षण अधिकांश मरीजों में देखे जाते हैं। यदि समय रहते मरीज डॉक्टर से परामर्श ले तो डायबिटीज होने की संभावना कम हो जाती है।
गंभीर स्थिति में हो सकता है मल्टी-ऑर्गन फेल्योर
अगर डायबिटीज की स्थिति गंभीर हो जाती है तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें हार्ट अटैक, लीवर और किडनी डैमेज, आंखों की रोशनी कमजोर होना जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं। कुछ मामलों में यह समय से पहले मृत्यु का कारण भी बन सकती है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और खानपान की आदतों में बदलाव करके इस बीमारी से बचा जा सकता है और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।