पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। मकर संक्रांति का हिन्दू धर्म में एक ख़ास महत्व होता है इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है की मकर संक्रांति के दिन सूर्य का गोचर पुत्र शनि की राशि मकर में होता है, अर्थात इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने जाते है इस दिन को पिता और पुत्र के बीच एक स्वस्थ रिश्ते के प्रतिक के रूप में मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और जरूरतमंद लोगों को खिचड़ी आदि जरूरत की वस्तुएं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति को हिंदू धर्म में दान पुण्य के कार्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन दान करने का महत्व धर्म शास्त्रों में सबसे खास माना गया है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और सर्दी घटना आरंभ हो जाती है। इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है और सभी शुभ कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। आइए जानते मकर संक्रांति पर स्नान और दान का मूहूर्त कब से कब तक है। साथ ही जानते हैं इस दिन दान पुण्य करने का क्या महत्व है।
मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। यह समय पूजा-पाठ और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है। अमृत काल सुबह 7 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय सुबह 8 बजकर 55 मिनट है। इस समय स्नान और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पुण्यकाल सुबह 8 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। महापुण्य काल सुबह 8 बजकर 55 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक का है। इस दौरान अमृत काल भी है, जो इसे और भी शुभ बनाता है।
मकर संक्रांति पर दान का बड़ा महत्व है। इस दिन कंबल, गर्म कपड़े, दरी, जूते, टोपी, तिल, गुड़, खिचड़ी और घी जैसी चीज़ें दान करने से पुण्य मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान से आपके वर्तमान और भविष्य दोनों अच्छे होते हैं। यह दान 10 अश्वमेघ यज्ञ और 1000 गायों के दान के बराबर फल देता है। मान्यताओं के अनुसार इससे जीवन में सफलता और सुख-शांति मिलती है। साथ ही, कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों का शुभ प्रभाव भी बढ़ता है। इससे न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सफलता और खुशहाली भी आती है।