प्रयागराज. महाकुंभ में बुधवार को मची भगदड़ पर राजनीति तेज हो गई है. इस घटना को लेकर अब शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि महाकुंभ में राजनीतिक दलों के वीआईपी नेताओं को दूर रहना चाहिए था.
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “महाकुंभ 144 वर्षों बाद आया है और यह एक पवित्र संयोग है. सरकार और प्रशासन को पता था कि महाकुंभ में भीड़ होने वाली थी, वे बताते थे कि 10 से 20 करोड़ लोग आएंगे. ऐसे आंकड़े बताकर उन्होंने महाकुंभ मेले की राजनीतिक मार्केटिंग शुरू की और कल जो हुआ, वह एक राजनीतिक हादसा है. इसके लिए राजनेता और योगी-मोदी सरकार का वीआईपी कल्चर जिम्मेदार है. जिस तरह से वहां पूरी व्यवस्था वीआईपी के पीछे लगी है, इसके चलते आम श्रद्धालुओं का ख्याल नहीं रखा गया.”
संजय राउत के आरोप
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने कहा:
✔️ महाकुंभ 144 वर्षों बाद आया है, यह एक पवित्र अवसर था, लेकिन सरकार ने इसे राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना दिया।
✔️ वीआईपी कल्चर के कारण आम श्रद्धालुओं को उचित सुविधाएं नहीं मिलीं, जबकि नेता और मंत्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
✔️ रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और अन्य नेताओं के लिए एक-एक दिन के लिए पूरे इलाके को बंद कर दिया गया, जिससे व्यवस्था चरमरा गई और भगदड़ मच गई।
✔️ महामंडलेश्वरों का कहना है कि आयोजन स्थल को सेना के हवाले कर देना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण उचित व्यवस्था नहीं हो पाई।