महाकुंभ: मौनी अमावस्या स्नान के दौरान भगदड़, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ने जताया दुख

By: PalPal India News
January 29, 2025

प्रयागराज। मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम नोज घाट पर हुए स्नान के दौरान भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। सुबह 7:30 बजे तक कॉल्विन अस्पताल में कई एंबुलेंस पहुंच चुकी थीं, लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, 200 से अधिक श्रद्धालुओं का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

हादसे के बाद संगम से लेकर महाकुंभ के केंद्रीय चिकित्सालय तक हाहाकार मचा हुआ है। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। पूरी रात एंबुलेंस के सायरन गूंजते रहे। बताया जा रहा है कि बैरिकेडिंग के कारण भीड़ का दबाव बढ़ा, जिससे भगदड़ की स्थिति बनी। घटना स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्नान जारी है।

मंगलवार को महाकुंभ में मौनी अमावस्या के मौके पर यह दर्दनाक हादसा हुआ। देर रात संगम नोज के पास अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 17 श्रद्धालुओं की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रयागराज महाकुंभ मेला के दौरान हुई भगदड़ पर गहरा शोक व्यक्त किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला के दौरान हुई भगदड़ पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, “प्रयागराज महाकुंभ में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है. इसमें जिन श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. इसके साथ ही मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.”प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय प्रशासन की सराहना की और कहा कि वे पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटे हुए हैं.

सुबह 9 बजे तक इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना रात 1 से 2 बजे के बीच हुई। मृतकों के परिजनों ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। पोल नंबर 11 से 17 के बीच भीड़ अधिक थी, तभी अचानक पीछे से एक तेज रेला आया, जिससे कई लोग संतुलन खो बैठे और गिर पड़े।

नीचे गिरे लोगों को पीछे से आ रही भीड़ ने रौंद दिया। अपनों को बचाने के प्रयास में कई अन्य लोग भी भगदड़ की चपेट में आ गए। पुलिस जब तक हालात संभाल पाती, तब तक कई लोग बेहोश हो चुके थे। कुछ लोग होश में थे, लेकिन वे इतनी बुरी हालत में थे कि कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थे।

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