लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आबकारी नीति 2025-26 में बड़ा बदलाव किया है। अब शराब की दुकानों का लाइसेंस ई-लॉटरी के जरिए दिया जाएगा, जिससे पुराने लाइसेंस धारकों को सीधे रिन्यूअल का मौका नहीं मिलेगा। हालांकि, 2026-27 के वित्तीय वर्ष से रिन्यूअल की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। सरकार ने पहली बार कंपोजिट शराब दुकानें खोलने की अनुमति दी है, जहां बीयर, देशी और विदेशी शराब एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। हालांकि, इन दुकानों में शराब पीने की अनुमति नहीं होगी।
प्रीमियम ब्रांड स्टोर और नई शर्तें
मॉल्स के मल्टीप्लेक्स एरिया में प्रीमियम ब्रांड की दुकानों को खोलने की इजाजत नहीं होगी।
एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन के मुख्य भवनों में ये दुकानें खोली जा सकेंगी।
विदेशी शराब अब 60 एमएल और 90 एमएल की बोतलों में भी उपलब्ध होगी।
देशी शराब अब एसेप्टिक ब्रिक पैक में मिलेगी, जिससे मिलावट की संभावना कम होगी।
होम लाइसेंस की सुविधा- यदि कोई व्यक्ति अपने निजी उपयोग के लिए अधिक मात्रा में शराब रखना चाहता है, तो उसे वैयक्तिक होम लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए:
सालाना फीस: ₹11,000
सिक्योरिटी डिपॉजिट: ₹11,000
यह लाइसेंस केवल उन्हीं को मिलेगा, जो पिछले 3 वर्षों से आयकरदाता हैं।
राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य- सरकार इस नई नीति के जरिए 55,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की योजना बना रही है, जो पिछले साल की तुलना में 4,000 करोड़ रुपये अधिक है। नई आबकारी नीति से शराब कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व वृद्धि को बढ़ावा देने की उम्मीद की जा रही है।