पलपल इंडिया प्रतिनिधि,जबलपुर। मध्य प्रदेश रेलवे लगातार यात्री ट्रेनों की संख्या में इजाफा कर रही है, जिससे यात्रियों काे किसी भी तरह की सीट को लेकर असुविधा न हो कंफर्म सीट मिले, लेकिन रेलवे के पास निर्धारित ट्रैक है। रेलवे ने ट्रेनों की संख्या और गति बढ़ाने के लिए रेल ट्रैक का विस्तार करने के साथ आधुनिक सिग्नल लगाना शुरू कर दिया है। इसलिए क्षमता बढ़ाने के लिए सिग्नल का आधुनिकरण किया जा रहा है। आपको बता दे इसलिए इटारसी-मानिकपुर के बीच लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा सिग्नल लगाए गए हैं, लेकिन जबलपुर रेल मंडल में आटोमैटिक सिग्नल लगने की बाद संख्या 600 से ज्यादा हो गई है। वर्तमान में जबलपुर रेल मंडल में ट्रैक पर ट्रेन की गति 110 किमी प्रति घंटा है जो आटोमैटिक सिग्नल सिस्टम लगने के बाद 130 किमी प्रति घंटे तक हो जाएगी।
आपको बता दे रेलवे बोर्ड इटारसी से जबलपुर और जबलपुर से मानिकपुर तक लगभग 510 किमी लंबे रेलवे ट्रैक पर आटोमैटिक सिग्नल सिस्टम लगाएगी। इन सिग्नल के लगने से दो रेलवे स्टेशन के बीच एक साथ चार से पांच ट्रेनें चलाना आसान हो जायेगा। अगर अभी की बात करे तो मैन्युअल और पूर्ण ब्लाक सिग्नल सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे दो स्टेशनों के बीच दो ट्रेनें ही चलाई जा सकती हैं, पर आटोमैटिक सिग्नल की मदद से ट्रेनों की संख्या और गति, दोनों में इजाफा होगा।
ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम क्या है ?
ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली है, जो रेलवे ट्रैक पर लगी एक पूरी तरह से कंप्यूटराइज़्ड प्रणाली है। इसमें दो स्टेशनों के बीच एक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं। स्टेशन यार्ड से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर एडवांस स्टार्टर सिग्नल लगा होता है। इसकी लागत कम आती है। इसमें ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल लगाती है, जिससे इनकी लागत कम आती है और यह चोरी नहीं होते। जब कोई ट्रेन स्टेशन यार्ड में प्रवेश करती है तो सिग्नल के ज़रिए स्टेशन मास्टर को सूचना मिल जाती है। इसके बाद, सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहती हैं।सिग्नल ग्रीन होते ही ट्रेनें एक के पीछे एक चलती हैं।
यदि किसी कारण सिग्नल में तकनीकी खामी आती है तो पीछे चल रही ट्रेनों को इसकी सूचना मिल जाती है, इससे जो ट्रेनें जहां होंगी, वहीं रुक जाएंगी. इससे दुर्घटना की संभावना काफी कम हो जाती है। आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम की मदद से ट्रेनों की रफ़्तार में इजाफा होता है।