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बॉलीवुड में कई एक्टर ऐसे हैं जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर एक अलग पहचान कायम की है। इनमें से एक नाम है संजय मिश्रा का। वह जब भी पर्दे पर किसी किरदार को निभाते हैं तो उसे सिर्फ़ निभाते नहीं, बल्कि उसे जीते हैं।
दरभंगा में जन्में संजय ने एक अभिनेता के तौर पर जो सफ़र तय किया है, यह डायलॉग उसपर बिलकुल सटीक बैठता है। लेकिन इसमें कई उतार-चढ़ाव भी आए हैं…
उनकी ज़िंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने फिल्में करना छोड़ दिया था। अपने पिता के निधन के बाद वह बहुत ज़्यादा दुःखी हो गए थे, अकेले रहना चाहते थे, इसलिए ऋषिकेश चले गए और एक ढाबे पर काम करने लगे। ढाबे के मालिक ने तो उन्हें नहीं पहचाना; लेकिन जो ग्राहक वहाँ आते, वे उन्हें पहचान जाते थे। और कहते थे “आप गोलमाल वाले हैं न?”
लेकिन क़िस्मत फिर पलटी और कुछ समय बाद उन्होंने दोबारा एक के बाद एक बढ़िया फिल्मों में काम करना शुरु किया। काम भी ऐसा कि उनके सामने बड़े-बड़े एक्टर्स फेल हो जाएं। आज वह बॉलीवुड का एक जाना-माना नाम बन चुके हैं और उनका हर किरदार लाजवाब है।